
वॉशिंगटन। बच्चों को टारगेट कर बनाए जाने वाले वीडियो को लेकर अमेरिका में यूट्यूब के खिलाफ जांच हो रही है। फेडरल ट्रेड कमिशन (एफटीसी) द्वारा की जा रही इस जांच को लेकर कहा जा रहा है कि यदि यूट्यूब को नियमों को तोड़ने का दोषी पाया गया तो उस पर भारी जुर्माना हो सकता है। यह जांच अभिभावकों और उपभोक्ता समूहों की शिकायत के बाद शुरू हुई है। यूट्यूब पर आरोप है कि बच्चों से जुड़ी जानकारी और डाटा एकत्र कर उन्हें हानिकारक व अनुचित सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
एक और गंभीर आरोप यह है कि यूट्यूब ने बच्चों को अनुचित और वयस्क सामग्री सर्च करने की अनुमति दी। बच्चों के सर्च इंजन में भ्रामक सूचना और अनुचित सामग्री दिखाई गई। यूट्यूब की मुख्य साइट और ऐप 13 साल या उससे अधिक आयुवर्ग के यूजर्स के लिए है, जबकि 13 से कम उम्र के बच्चों के लिए यूट्यूब किड्स ऐप है, जो सामग्री को फिल्टर कर उन तक पहुंचाता है। बच्चों के लिए इस ऐप को अभिभावकों की अनुमति से चलाया जाता है और इसमें यूट्यूब बच्चों की कुछ जानकारियां जुटाता है ताकि उन्हें कार्टून, नर्सरी राइम्स आदि दिखा सके। अब अभिभावकों का आरोप है कि ऐप पर फिल्टर के बाद भी बच्चों को अनुचित वीडियो उपलब्ध हो रहा है।
बता दें, अमेरिका में इन दिनों गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और फेसबुक जैसी टेक कंपनियों के खिलाफ जांच चल रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कह चुके हैं कि इन कंपनियों की ताकत चिंता का कारण है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कंपनियों ने प्रतिस्पर्धा की भावना और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी ताकत का दुरुपयोग किया है या नहीं।





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