
ताइवान में आज यानी शनिवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है। अलजजीरा के मुताबिक ताइवान के लोग 8 बजे से मतदान के लिए लाइनों में लगे हैं। वोटिंग शाम 4 बजे तक जारी रहेगी। देश के लाखों मतदाताओं के लिए 18 हजार पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं।
नतीजे शनिवार देर रात तक आएंगे। न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक एकतरफ जहां, ताइवान के लोग मतदान कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ उनके हवाई क्षेत्र में चीन के 2 रहस्यमयी गुब्बारे और फाइटर जेट उड़ान भर रहे हैं। मतदान से पहले चीन ने मौजूदा उपराष्ट्रपति लाई चिंग-ते को एक खतरनाक अलगाववादी बताया।
मतदाताओं को चेतावनी दी कि यदि वे सैन्य संघर्ष से बचना चाहते हैं, तो सही विकल्प चुनें। दरअसल, उप राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ताइवान की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के राष्ट्रपति पद के दावेदार हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक वो लोगों के बीच लोकप्रिय हैं, उनके चुनाव जीतने की काफी संभावना जताई जा रही हैं।

तस्वीर ताइवान में मतदान के लिए लाइनों में लगे लोगों की है।
चीन से रिश्ते सुधारने पर विपक्ष का जोर
ताइवान के चुनाव में विपक्ष की कुओमिनतांग पार्टी (KMT) ने होउ यू इह पर अपना दाव खेला है। KMT वही पार्टी है जिसकी सरकार चीन के कम्युनिस्टों से गृह युद्ध में हारकर ताइवान द्वीप पर आ बसी थी। 66 साल के होऊ यू इह राजनीति में आने से पहले पुलिस फोर्स के हेड रह चुके हैं।
वो फिलहाल न्यू ताइपे के मेयर हैं। उनका वादा है कि वो सत्ता में आने के बाद देश की सुरक्षा को मजबूत करेंगे और चीन से फिर से बातचीत शुरू कर रिश्ते सुधारेंगे।
ताइवान चुनाव में राष्ट्रपति पद के लिए तीसरे अहम दावेदार को वेन जे हैं। उन्होंने 2019 में ताइवान पीपल्स पार्टी बनाई थी। को चीन के मामले में बीच का रास्ता अपनाने के समर्थक हैं। चुनावी कैंपेन में वो खुद को ऐसे कैंडिडेट के तौर पर पेश कर रहे थे जो चीन और अमेरिका दोनों को स्वीकार होगा।
ताइवान के 3 दावेदार

दुनिया के लिए क्यों जरूरी ताइवान का चुनाव
ताइवान में केवल 2 करोड़ 30 लाख लोग हैं। इसके बावजूद ताइवान चुनाव के नतीजों का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। दरअसल, चीन 36,193 स्केवयर किलोमीटर में फैले ताइवान द्वीप पर अपना दावा ठोकता रहा है। ताइवान से ही दुनिया में 90% सेमीकंडक्टर्स की सप्लाई होती है।
ये चिप्स इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का दिमाग होती हैं। कंप्यूटर, लैपटॉप, कार, वॉशिंग मशीन, ATM, अस्पतालों की मशीन से लेकर हाथ में मौजूद स्मार्टफोन तक सेमीकंडक्टर चिप पर ही काम करते हैं। सेमीकंडक्टर्स पर न सिर्फ ताइवान बल्कि पूरी दुनिया की इकोनॉमी निर्भर करती है।
ट्रेंड फोर्स के मुताबिक सेमीकंडक्टर्स की तुलना तेल से होने लगी है। ताइवान में कुछ भी होगा तो उसका असर सेमीकंडक्टर्स की इंडस्ट्री पर पड़ेगा, जिससे पूरी दुनिया में इसकी सप्लाई चेन बाधित होगी।






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