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सौर ऊर्जा का वैकल्पिक ऊर्जा के रूप में प्रयोग किया जा सकता डॉ: राठौर | Shivpuri News

शिवपुरी। शासकीय श्रीमंत माधवराव सिंधिया स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिवपुरी में इको क्लब द्वारा सौर ऊर्जा के बेहतर प्रयोग विषय पर कार्यशाला का आयोजन प्रभारी प्राचार्य प्रो महेंद्र कुमार के आदेशानुसार एवं डॉ जी.पी शर्मा के निर्देशन में किया गया। इस कार्यशाला में प्रोफेसर बी.के जैन, प्रो मंजू वर्मा प्रो एमएस हिंडोलिया एवं डॉ रामजी दास राठौर के साथ महाविद्यालय के अनेक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ बी.के जैन ने बताया कि सौर ऊर्जा वह उर्जा है जो सीधे सूर्य से प्राप्त की जाती है। सौर ऊर्जा ही मौसम एवं जलवायु का परिवर्तन करती है। यहीं धरती पर सभी प्रकार के जीवन (पेड़-पौधे और जीव-जन्तु) का सहारा है। वैसे तो सौर उर्जा के विविध प्रकार से प्रयोग किया जाता है, किन्तु सूर्य की उर्जा को विद्युत उर्जा में बदलने को ही मुख्य रूप से सौर उर्जा के रूप में जाना जाता है। सूर्य की उर्जा को दो प्रकार से विद्युत उर्जा में बदला जा सकता है। पहला प्रकाश-विद्युत सेल की सहायता से और दूसरा किसी तरल पदार्थ को सूर्य की उष्मा से गर्म करने के बाद इससे विद्युत जनित्र यंत्र चलाकर। सौर उर्जा सबसे अच्छा उर्जा है।यह भविष्य में उपयोग करने वाली उर्जा है। सूर्य से सीधे प्राप्त होने वाली ऊर्जा में कई खास विशेषताएं हैं। जो इस स्रोत को आकर्षक बनाती हैं। इनमें इसका अत्यधिक विस्तारित होना, अप्रदूषणकारी होना व अक्षुण होना प्रमुख हैं। सम्पूर्ण भारतीय भूभाग पर ५००० लाख करोड़ किलोवाट घंटा प्रति वर्ग मी० के बराबर सौर ऊर्जा आती है जो कि विश्व की संपूर्ण विद्युत खपत से कई गुने अधिक है। देश में वर्ष में लगभग २५० से ३०० दिन ऐसे होते हैं जब सूर्य की रोशनी पूरे दिन भर उपलब्ध रहती है।
इस अवसर पर डॉ रामजी दास राठौर में अपने विचार व्यक्त करते हुए छात्र छात्राओं को बताया कि
सौर ऊर्जा, जो रोशनी व उष्मा दोनों रूपों में प्राप्त होती है, का उपयोग कई प्रकार से हो सकता है। सौर उष्मा का उपयोग अनाज को सुखाने, जल उष्मन, खाना पकाने, प्रशीतन, जल परिष्करण तथा विद्युत ऊर्जा उत्पादन हेतु किया जा सकता है। फोटो वोल्टायिक प्रणाली द्वारा सूर्य के प्रकाश को विद्युत में रूपान्तरित करके प्रकाश प्राप्त की जा सकती है, प्रशीलन का कार्य किया जा सकता है, दूरभाष, टेलीविजन, रेडियो आदि चलाए जा सकते हैं, तथा पंखे व जल-पम्प आदि भी चलाए जा सकते हैं। 
वैसे तो सौर ऊर्जा का प्रयोग काफी लाभकारी है फिर भी सौर ऊर्जा के प्रयोग से कई परेशानियां भी होती हैं। पहला,व्यापक पैमाने पर बिजली निर्माण के लिए पैनलों पर भारी निवेश करना पड़ता है। दूसरा, दुनिया में अनेक स्थानों पर सूर्य की रोशनी कम आती है, इसलिए वहां सोलर पैनल कारगर नहीं हैं। तीसरा, सोलर पैनल बरसात के मौसम में ज्यादा बिजली नहीं बना पाते।
चौथा, सौर ऊर्जा निरंतर खर्चीली है और इस पर भारी निवेश की जरूरत पड़ती है। पांचवा,सौर ऊर्जा का स्‍वरूप अस्थिर है जिससे इसे ग्रिड में समायोजित करना मुश्किल होता है। छठवां, लोगों की जागरुकता का अभाव, उच्‍च उत्‍पादन लागत तथा वर्तमान ऊर्जा को छोड़ने की सीमाएं देशभर में सौर ऊर्जा क्षमता के भरपूर दोहन की दि‍शा में मुख्‍य बाधा के रूप में मानी गई हैं।फिर भी विशेषज्ञों का मत है कि भविष्य में सौर ऊर्जा का अधिकाधिक प्रयोग होगा। भारत के प्रधानमंत्री ने हाल में सिलिकॉन वैली की तरह भारत में सोलर वैली बनाने की इच्छा जताई है। भारत में सौर ऊर्जा हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा किया जाता है। भारत की घनी आबादी और उच्च सौर आतपन सौर ऊर्जा को भारत के लिए एक आदर्श ऊर्जा स्रोत बनाता है।
राघव उपाध्याय ने बताया कि सौर ऊर्जा भविष्य में काफी मददगार होगी क्योंकि ऊर्जा के सभी साधन नाशवान है लेकिन सौर ऊर्जा हमेशा बनी रहेगी। इसका हमें सदुपयोग करना चाहिए। छवि गुप्ता ने बताया कि हमें ऊर्जा उपकरणों में अधिक से अधिक सोलर पैनलों का प्रयोग करना चाहिए जिससे कि हम अपनी काफी विद्युत ऊर्जा को बचा सकते हैं इस तरह हम पैसे की बचत भी कर सकते हैं।
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