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घटयात्रा के साथ हुआ पंचकल्याणक महामहोत्सव का आगाज़, मंत्री सिंधिया भी हुए शामिल / Shivpuri News

शिवपुरी। जैन समाज के सबसे बड़े आयोजन श्री 1008 मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक महामहोत्सव का प्रारम्भ आज घटयात्रा के साथ प्रारम्भ हुआ। जिसमें केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री  ज्योतिरादित्य  सिंधिया ने शामिल होकर मुनि संघ से आशीर्वाद प्राप्त किया, तथा आयोजन समिति द्वारा श्रीमंत का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया।
      इस अवसर पर श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया जी मे कहा कि आत्मा से में जैन समाज का प्रसंसक हूँ, जिओ ओर जीनो दो, को हर  किसी को अपने जीवन मे शामिल करना चाहिए।  जैन समाज की क्षमावाणी सभी को अपनाना चाहिए। लोग माफी मांगने में सभी संकोच करते हैं, परन्तु जैन समाज अपनी गलतियों की सभी से क्षमा मांगते हैं। मैंने जैन समाज से बहुत कुछ सीखा है, और आगे भी मैं अपने जीवन काल मे बहुत कुछ जैन समाज से सीखने के लिए उत्सुक हुँ। साथ ही पंचकल्याणक महामहोत्सव के माध्यम से हम वास्तव में आत्मा से परमात्मा बनने की कला को सीख सकते हैं ।
     पूज्य मुनी श्री अभय सागर महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि जीवन मे जिनका लक्ष्य आत्म उद्धार करता है,  आज घटयात्रा के माध्यम से उसका मंगलाचरण हुआ है, यह मात्र घटयात्रा नही है, इसका उद्देश्य सिर्फ भीड़ जुटाना नही बल्कि धर्म के महत्व का दिग्दर्शन कराने वाले चरित्र का चित्रण होने वाला है, आत्मा से परमात्मा बनने वाले चरित्र का उद्घटान होने वाला है। परन्तु जब तक वाह्य क्रियाएं मात्र राग-द्वेष की परिणति से जुड़ी रहती है, जो सिर्फ कर्म बंध का ही कारण बनती हैं, जबकि क्रियाएं अंतरंग से हों और उसमें परमार्थ जुड़ जाए, तो राग में भी आत्मा विरागता की ओर परिणित हो जाएगी। जिसने-जिसने छोड़ा है, असल में उसने परमात्मा से अपना नाता जोडा है।
   उंन्होने कहा कि, जीवन में जब कुछ बुरा लगे, और वो बुरा भी बुरा का काम कर जाए, तो कल्याणक का कारण होता है। और जीवन को सार्थक बनाता है।
    मुनि श्री निरीह सागर जी महाराज ने कहा कि पंचकल्याण में आत्मा के महत्व को समझने की प्रक्रिया है। यहां की प्रत्येक क्रिया का अपना एक महत्व होता है। संसारी क्रियाये और धर्मिक क्रियाओं में अंतर होता है। आजका दिन मंगलमय है। अपने अंदर ऐसे भाव जागृत करो कि मैं आत्मा से परमात्मा कब बनु, तो पंचकल्याण जिस नगर में होता है तो मानना चाहिए कि उस नगर के जीवों का सामूहिक पूण्य कर्म का उदय है। आज प्रथम चरण में उत्तर ध्वजा रोहण के समय उत्तर की ध्वजा कुबेर की दिशा की ओर गई, जो धन्य धान्य समृद्धि के साथ सुख शांति और अभूतपूर्व प्रभावना का संकेत मानी जाती है।
     उल्लेखनीय है कि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य परम पूज्य मुनि श्री अभयसागर जी महाराज, मुनि श्री प्रभातसागर जी महाराज एवं मुनि श्री निरीहसागर जी महाराज जी महाराज के मंगल सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी श्री प्रदीप भैया ‘सुयश’ के निर्देशन में 13 वर्ष बाद शिवपुरी में पंचकल्याणक महा-महोत्सव आयोजित हो रहा है, जिसमें प्रातः 7 बजे से पूज्य मुनिसंघ के सान्निध्य में छत्री मंदिर से घटयात्रा का प्रारम्भ हुआ, जिसमें महिलाएं अपने-अपने मंडलों की ड्रेसों में तथा कुछ पीली साड़ी में मस्तक पर शुद्ध जल के कलश लेकर चल रही थीं । वहीं भगवान के माता-पिता, सौधर्म इंद्र आदि सभी महापात्र हाथियों पर सवार थे।  घटयात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए गांधी पार्क में में बने विशाल पंडाल में पहुंची जहाँ शुद्ध जल व मंत्रोच्चार से पंडाल एवं वेदी की शुद्धि की गई। इसके पूर्व ध्वजारोहण कर्ता सेठ वीरेंद्र कुमार, मनोज कुमार जैन पत्ते वालों द्वारा ध्वजारोहण किया गया। समस्त महिला संघठनों ने परेड कर ध्वज को सलामी दी। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुण्यार्जक परिवार ने हेलीकॉप्टर में बैठकर  पुष्प वृष्टि की।
     दोपहर में सभी महायपात्रों के द्वारा यागमंडल विधान किया गया। तथा रात्रि में सौधर्म इंद्र का दरबार लगा जिसमें उसका आसान कम्पायमान हुआ, और उसने अवधि ज्ञान से जाना कि प्रभु गर्भ में आने वाले हैं। साथ ही माता के 16 स्वप्न्न नवीन ग्राफिक्स तकनीक के साथ विशाल एल ई डी स्क्रीन पर दिखाई गए। आज की महाआरती के पुण्यार्जक श्री प्रेमचंद राजेश कुमार प्रेम स्वीट परिवार रहे।
आज  सोमवार को गर्भ कल्याणक का उत्तर रूप
     पंचकल्याणक के दूसरे दिन भगवान का गर्भ कल्याणक मनाया जाएगा जिसके अंतर्गत प्रातः पूजन विधान कार्यक्रम होगा। दोपहर 2 बजे पांडाल से घटयात्रा प्रारम्भ होकर पुरानी शिवपुरी जिनालय पहुंचेगी जहां वेदी शुद्धि, शिखर शुद्धि एवं सीमंतनी क्रियाएं होंगी। रात्रि में राजा नाभिराय का दरबार, माता के 16 स्वपन्नों का फल तथा सतेंद्र एंड पार्टी दिल्ली द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम दिए जाएंगे।
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