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एक और साल खत्म, पूरे नहीं हो सका सीवर व पेयजल का काम / Shivpuri News

शिवपुरी। साल 2021 खत्म होने को है और एक बार फिर सिंध और सीवर प्रोजेक्ट खत्म नहीं हुए है। शहर के विकास के लिए शुरू की गई सिंध जलावर्धन योजना और सीवर प्रोजेक्ट अब जनता के लिए सफेद हाथी बन चुके हैं। हाल ही में सीवर प्रोजेक्ट की क्रियान्वयन एजेंसी पीएचई ने कंपनी को ब्लैकलिस्टेड करने की तैयारी कर ली है। पूर्व में सिंध जलावर्धन योजना की कंपनी दोशियान को ब्लैकलिस्टेड किया गया था। इसके बाद सिंध की क्या स्थिति हुई थी इससे सभी वाकिफ हैं। अब वही हाल सीवर प्रोजेक्ट का हो रहा है। साल-दर-साल बीतता जा रहा है, लेकिन यह दोनों प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पा रहे हैं। स्थिति यह है कि यह दोनों प्रोजेक्ट अन्य योजनाओं के लिए भी परेशानी बन रहे हैं। सीवर प्रोजेक्ट के कारण माधव नेशनल पार्क को भी नुकसान हो रहा है। इसके चलते दो दिन पूर्व वन विभाग और पीएचई व नपा की बैठक ाी हुई है। खैर स्थिति यह है कि यह साल भी पूरा बीत जाएगा और यह प्रोजेक्ट अधूरे ही रहेंगे।

सीवर प्रोजेक्टः 21 महीने में पूरा होने था प्रोजेक्ट, अब कंपनी ब्लैकलिस्टेड होगी

सीवर प्रोजेक्ट को वर्ष 2015 में ही पूर्ण हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक एक भी कनेक्शन इसका नहीं हुआ है। अभी भी मिलान का काम चल रहा है। इस देरी के कारण 60 करोड़ का प्रोजेक्ट 112 करोड़ का हो गया। इतना ही नहीं 20 एमएलडी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण 19.70 करोड़ की लागत से होना था। इसके लिए मेसर्स जीएसजे एन्वो लिमिटेड के साथ 65/2015 अनुबंध क्रमांक संपादित हुआ था। यह काम भी अभी तक पूरा नहीं हुआ है। जबकि इसके निर्माण की अवधि भी 24 महीने थी।

सिंध परियोजनाः दोशियान हुई ब्लैक लिस्टेड, उसी के अधिकारी को फिर से ठेका

सिंध जलावर्धन परियोजना दोशियान कंपनी को सौंपी गई थी। दोशियान कंपनी का काम और उस दौरान हुआ भ्रष्टाचार लगातार सुर्खियों में रहा। दोशियान ने शुरुआत दौर में ही एक साथ जीआरसी पाइपों की खेप खपा दी, जो कंपनी ने स्वयं बनाए थे। इन पाइपों का तत्कालीन नपाध्यक्ष और सीएमओ ने भुगतान भी कर दिया। दोशियान के कामों की जांच के लिए गठित समिति के सदस्य एवं जल संसाधन विभाग के रिटायर कार्यपालन यंत्री आरएनसिंह ने बिछाए गए पाइपों का प्रैशर जांचने (हाइड्रो टेस्टिंग) के बारे में खुलासा किया कि लाइप बिछाने के बाद प्रैशर की रिपोर्ट ही शामिल नहीं की गई। दोशियान ने जीआरपी पाइप डाले थे, वे गुणवत्तीविहीन थे। इसके बाद दोशियान को ब्लैक लिस्टेड कर ओम कंस्ट्रक्शन को काम दिया गया। इस कंपनी ने जीआरसी की जगह एमएस पाइप डाले। मजे की बात यह है कि सिंध में भ्रष्टाचार के लिए जो दोशियान जिम्मेदार थी उसी के मैनेजर महेश मिश्रा की कंपनी ओम कंस्ट्रक्शन को दोबारा काम दिया गया।

बुझाना थी शहर की प्यास, कनेक्शन मिले चंद हजार

जिस सिंध परियोजना को शहर की दो लाख आबादी की प्यास बुझाना थी उसमें करोड़ों खर्च करने के बाद चंद हजार कनेक्शन ही दिए जा सके हैं। आज भी शहर बड़ी आबादी पानी के लिए बोरिंग पर निर्भर है। पहले इस योजना का ठेका दोशियान के पास था। इसकी कार्यप्रणाली काफी विवादित रही और इनके द्वारा डाली गई लाइन को भी दोबार से खोदा जा रहा है। इस योजना के नाम पर ठगे गए शहरवासी अब इसके कनेक्शन लेने के लिए ही ओ नहीं आ रहे हैं। अब नगर पालिका को इसके कनेक्शन देने के लिए जगह-जगह कैंप लगाने पड़ रहे हैं।

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