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कूनो नेशनल पार्क से भागे चीते ओबान को ट्रेंकुलाइज कर वापस कूनो में छोड़ा / Shivpuri News

शिवपुरी: कूनो नेशनल पार्क से भागे चीता ओवान को ट्रेंकुलाइज कर वापस लाया गया है। चीता विशेषज्ञ और डॉक्टरों की टीम ने गुरुवार देर शाम एक खेत में चीते को ट्रेंकुलाइज किया। आज यानी शुक्रवार सुबह उसे वापस कूनो में छोड़ दिया है। चीता ओवान शिवपुरी जिले के जंगल की ओर बढ़ रहा था, उसके लगातार रिहायशी इलाकों में पहुंचने पर कूनो प्रशासन ने यह कदम उठाया। जबकि मादा चीता आशा अभी भी धौरेट सरकार के जंगल में है।


कूनो प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रेंकुलाइज करने के लिए सबसे पहले उसकी घेराबंदी की गई। चीते को इस तरह से घेरा गया कि वह एक ही निश्चित दिशा में भाग सके। उसी ओर इंजेक्शन लेकर बेहोश करने वाली टीम छुपकर खड़ी हो गई। जब चीता भागा तो उसे इंजेक्शन लगाकर बेहोश किया गया। चीते के बेहोश होते ही वन अमला और डॉक्टर विशेषज्ञों की टीम उसके पास पहुंची। उसकी आंखों पर कपड़ा लगाया, फिर ड्रिप लगाई गई। ऑक्सीजन भी लगाया गया।

मौके पर प्राइमरी ट्रीटमेंट देकर, चीते को पिंजरे में डालकर वन विभाग की टीम कूनो में वापस ले आई। इस दौरान कुछ ही दूरी पर किसान और ग्रामीण भी मौजूद थे। चीते को डाबरपुरा गांव निवासी किसान मोहन यादव खेत से पकड़ा गया है। बता दें, नामीबिया से 17 सितंबर को 8 चीतों को लाया गया था। इन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाड़े में रिलीज किया था। हाल ही में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों की दूसरी खेप कूनो लाई गई थी।

स्ट्रेस के डर से नहीं कर रहे थे ट्रेंकुलाइज

चीता ओवान करीब 5 दिन पहले 2 अप्रैल को कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकल गया था। सबसे पहले रविवार को उसे झार बड़ौदा इलाके में देखा गया। इसके बाद वह लगातार अलग-अलग रिहायशी इलाकों में दिखा। गुरुवार को चीता शिवपुरी जिले के बैराड़ इलाके के डाबर पुरा गांव के पास खेतों में पहुंच गया था। शुरुआती दौर में जानकारी सामने आई थी कि चीते को ट्रेंकुलाइज किया जाएगा, तो उसे स्ट्रेस होगा, लेकिन चीते को ट्रेस करती हुई पीछे पहुंची वन विभाग की टीम ने दक्षिण अफ्रीका के चीता एक्सपर्ट और डॉक्टरों की टीम की मौजूदगी में ओवान को ट्रेंकुलाइज करके पिंजरे में डाला। इसके बाद कूनो में लाया गया।

धौरेट सरकार के जंगल में रह रही आशा

मादा चीता आशा भी कूनो नेशनल पार्क के रिजर्वेशन से पिछले 4 दिन से बाहर है। हालांकि, वह रिहायशी इलाकों के आसपास न होकर कूनो के बफर जोन इलाके में धौरेट सरकार के जंगल में ही है, जिस पर वन अमला लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

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