शिवपुरी. शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा के खनियांधाना जनपद में आने वाले ग्राम डाबर में किसान 60 फीसदी धनिया व 40 प्रतिशत अन्य फसलें करता है। पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि व बारिश के बाद धनिया काला पड़ गया। गुरुवार को जब पत्रिका टीम इस गांव में पहुंची तो शायद ही कोई ऐसा आंगन या छत होगी, जहां धनिया की छनाई व सफाई हो रही हो। प्राकृतिक आपदा ने किसानों को इतना बड़ा नुकसान दे दिया कि अब उनके कई जरूरी काम अटक कर रह गए। गांव में सर्वे टीम तो पहुंची, लेकिन अब मुआवजा कितना और कब तक मिलेगा, यह पता नहीं।
दोपहर जब वहां पर महिला- पुरुष से लेकर बच्चे तक धनिया की बर्बाद हुई फसल को साफ करके उसमें से अच्छा धनिया निकालने में जुटे हुए थे। पॉलीथिन तिरपाल पर सूख रहा धनिया दूर से ही काला नजर आ रहा था, लेकिन आसमान पर छाए बादलों को देखकर किसान’ चिंतित थे। बारिश व ओलावृष्टि से न केवल धनिया काला हो गया, बल्कि उसकी खुशबू भी गायब हो गई। ऐसे खनियांधाना के पांच गांव में ओलावृष्टि व बारिश से 600 हेक्टेयर फसलें तबाह हुई हैं।
सर्वे का काम पूरा हो गया है तथा एक करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की है।
सुनील प्रभास, तहसीलदार खनियांधाना
हमने 35 बीघा में धनिया बोया था, जो यदि सही निकलता तो 15 लाख रुपए में बिकती। लेकिन इस बार महज हार्वेस्टर का खर्चा निकला तथा महज एक लाख रुपए ही मिल पाएंगे। बच्चों की फीस से लेकर दूसरे सभी काम अटक कर रह गए।
हमने अपने खेतों में सिर्फ धनिया बोया था, जो बारिश व
ओलों से पूरी तरह बर्बाद हो गया। हमारी नातिन की शादी होनी है, अब क्या खाएंगे और क्या शादी करेंगे। भगवान ने तो हमें मार दिया, अब तो सरकार ही कुछ करे.
जयकुमार यादव, पीड़ित कृषक, पानकुंवर, पीड़ित महिला कृषक, ग्राम डाबर
हमने अपनी 20 बीघा जमीन में धनिया बोया था। फसल भी अच्छी हुई थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। मेरी बेटी की शादी भी तय हो गई, लेकिन अब समझ नहीं आ रहा कि कैसे यह सब काम होंगे.
राजकुमार यादव, पीड़ित कृषक,
डाबर






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