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पशु बिभाग का दाबा: स्वाइन फीवर से नहीं किसी अज्ञात बीमारी से मर रहे सुअर / Shivpuri News

शिवपुरी में सुअरों में फैला स्वाइन फीवर लगातार सूअरों के लिए काल साबित हो रहा है। विभाग ने स्वाइन फीवर की पुष्टि करते हुए 216 सूअरों को मारकर नियमानुसार दफन किया है। इस एवज में सूअर पालकों को 6 लाख 66 हजार रुपए का मुआवजा भी वितरित किया है, जबकि वास्तविकता में मरने वाले सूअरों की संख्या हजारों में है। स्वाइन फीवर से जो सूअर स्वभाविक मौत मरे हैं उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया है।


विदित हो कि दिसम्बर माह के अंत में वार्ड क्रमांक 15 में मरे मिले सुअरों का विभाग द्वारा पीएम करवा करवाया गया था। 2 जनवरी को इस बात की पुष्टि हो गई कि शिवपुरी में स्वाइन फीवर है। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां कर वार्ड क्रमांक-15 के एक किमी के दायरे में रहने वाले सुअर पालकों के सुअरों को किल करना शुरू किया गया। विभाग के नियमों के अनुसार चार सुअर पालकों ने अपने 216 सुअर विभाग के सुपुर्द कर किल करवाए।

इन सभी सुअर पालकों को विभाग ने सुअरों के वजन के मान से 6 लाख 65 हजार 800 रुपये का मुआवजा वितरित किया है। ऐसे में जो सुअर पालक अपने सुअरों को किल होने से बचाने के प्रयास में लगे रहे उनके सुअर अंतत: स्वाइन फीवर के संक्रमण की चपेट में आकर काल के गाल में तो समाए लेकिन ऐसे सुअर पालकों को विभाग की तरफ से कोई मुआवजा नहीं दिया गया, क्योंकि निमयानुसार मुआवजा सिर्फ उन सुअरों का ही दिया जाना है जिन्हें महामारी के कारण किल किया जा रहा है। कुल मिलाकर ऐसे में सुअर पालकों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। विभाग के डाटा के अनुसार शिवपुरी में 25 जनवरी के बाद कोई भी सूअर पालक अपने सूअरों को किल के लिए लेकर नहीं आया है। कुल मिलाकर पशु विभाग यह मान चुका है कि फिलहाल स्वाइन फ़ीवर से अब सुअरों की मौत नहीं हो रही है।

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