शिवपुरी: करैरा जनपद के आदर्श ग्राम सिरसौद में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत पढ़ रहे एक एलकेजी का छात्र शिक्षा से वंचित करना पड़ रहा है। इसका कारण है बच्चे के फिंगर प्रिंट न आना। इस वजह से वह पढ़ाई के लिए विद्यालय नहीं जा पा रहा है। इससे छात्र और उसका पिता आनंदी प्रजापति काफी परेशान हो रहे है।
फीस का हवाला देकर स्कूल से निकला
दरअसल, आरटीई अधिनियम 2009 सामान्य बच्चों को 6 से 14 वर्ष की उम्र तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना सुनिश्चित करता है। इसके तहत सिरसौद गांव में एक गरीब परिवार के बच्चे का चयन प्राइवेट विद्यालय में किया गया। जहां बच्चे की शिक्षा कक्षा 1 में जारी थी। लगातार पढ़ाई के बाद इस वर्ष छात्र के फिंगर प्रिंट न आने से शासन ने प्राइवेट विद्यालय को भुगतान नहीं किया। इससे प्राइवेट विद्यालय ने फीस का हवाला देकर गरीबी रेखा के छात्र को विद्यालय से निकाल दिया है।
अधिकारी भी नहीं कर पा रहे सुनवाई
शिक्षा के अधिकार अधिनियम में पात्र होने के बाद भी छात्र दर दर की ठोकरे खा कर घर बैठ गया है। बेटे की शिक्षा को लेकर पिता भी चिंतित बना हुआ है। भले यह योजना गरीबी रेखा के लिए बनाई गई हो ऊपर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बेटे की शिक्षा को लेकर पिता ने करैरा से लेकर शिवपुरी तक अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही।






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