आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों में रह रहे विद्यार्थी पढ़ाई को लेकर बेहद परेशान, जिम्मेदारों ने नहीं ली सुध
शिवपुरी: आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों में रह रहे सैकड़ों विद्यार्थिय को इन दिनों पढ़ाई की टेंशन सता रहा है, क्योंकि एक महीने बाद बौर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, लेकिन उन्हें विभाग ने न तो किताबें उपलब्ध करवाई हैं. और न ही कापियों ऐसे में छात्रों की खुद के पास होने पर ही संदेह हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि आदिम जाति कल्याण विभाग के उत्कृष्ट छात्रावासँ में रहने वाले कक्षा 9 से 12 तक बच्च की विभाग द्वारा हास्टल में रहने, खाने की सुविधाओं के अलावा पढ़ने के लिए किताबें, कापियाँ, रजिस्टर पेन पेंसिल आदि स्टेशनरी पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है, ताकि पढ़ाई में अब्बल गरीब बच्चों को आगे की पढ़ाई जारी रखने में किसी भी तरह की परेशानी न हो, लेकिन शिवपुरी में आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की परीक्षाएं सिर में आ गई हैं। कक्षा 12 के बच्चों की परीक्षाएं 2 मार्च से शुरू होना है लेकिन शिवपुरी में छात्रावास में रहने वाले सैकड़ों बच्चों को अभी तक शासन द्वारा नती किताबें उपलब्ध करवाई हैं और न ही कापियों सहित अन्य स्टेशनरी। ऐसे में अब बच्चों को इस बात का डर सताने लगा है कि वह इस साल आखिर पास कैसे होंगे। वहीं
अधिकारी डिमांड भेजने की बात कह रहे हैं। अब डिमांड भेजेंगे फिर किताबें आएंगी तब तक बच्चों के लिए काफी देर हो चुकी होगी।
उधार की किताबों से पढ़ाई
स्टेशनरी घर से ला रहे
आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों का
कहना है कि उन्होंने अभी तक स्कूल में तो कक्षा के अन्य छात्रों की किताबों में से पढ़ाई कर ली, लेकिन अब परीक्षा का समय आ गया है। ज्यादातर बच्चों ने स्कूल जाना कम कर दिया है और वह सैल्फ स्टडी पर फोकस कर रहे हैं। इन हालातों में उन्हें अब अपने दोस्तों की किताबें भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। छात्रों का कहना था उन्होंने कापी और रजिस्टर तो घर से पैसे मंगवा कर खरीदे हैं। अगर घर से पैसे नहीं आते तो वह कापी और रजिस्टर तक के लिए तरस जाते।
दो
साल से नहीं मिली स्टेशनरी
छात्रों ने बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि उन्हें स्टेशनरी न मिली हो। बच्चों के अनुसार पिछले साल भी उन्हें किताबें और स्टेशनरी नहीं मिली थी। ऐसे में उन्हें पिछले साल भी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। खास बात यह है कि इस लापरवाही के कारण छात्रावास में पढ़ने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य खराब होने की कगार पर पहुंच गया है। पढ़ाई में अव्वल रहने वाले इन छात्रों जब पढ़ाई के लिए सामग्री उपलब्ध नहीं होगे तो यह आखिर उत्कृष्ट प्रदर्शन कैसे करेंगे?
यह बात सही है कि छात्रावासी में बच्ची को स्टेशनरी व अन्य सामग्री नहीं मिली है। इस साल स्टेशन बजट नहीं आया है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर ते पड़ा है। हमने डिमांड भी भिजवा दी है, बजट आने के बाद बच्चों को किताबें उपलब्ध हो जाएंगी।
महावीर जैन, जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग।

किताब मिलीं न कापी, परीक्षा में सिर्फ एक माह बाकी, कैसे आएंगे पढ़ाई में अब्बल / Shivpuri News
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