शिवपुरी: 3 साल पहले जब खुदाई में मूर्ति निकली थी तब यह दिगंबर अवस्था में थी और इस पर किसी भी तरह का शृंगार नहीं था। छाया चित्रों के माध्यम से हमने देखा है और वीडियो से भी जाहिर है। ऐसे में इस मूर्ति पर आंखें लगाकर और माला पहनाकर आप क्या दर्शना चाहते हैं। यह गलत है और आपको इस पर रोक लगाना चाहिए। जब यह बात पुलिस कोतवाली में रखी खुदाई में निकली मूर्ति को देख कर जैन मुनि सुप्रभ सागर महाराज और दर्शित सागर महाराज ने कही तो वहां मौजूद ए एस आई कैलाश शर्मा बोले हमसे गलती हो गई आगे भविष्य में किसी भी तरह की पूजा-अर्चना अंदर नहीं होगी और हम इसकी देखरेख भी करेंगे।
दरअसल 18 मार्च 2020 को झांसी तिराहा आईटीआई के पास सामने निर्मित हो रहे छात्रावास की खुदाई के दौरान भगवान आदिनाथ की सांगोपांग प्रतिमा के साथ पूरा परिकर निकला था चुकी पहली फर्सी खोजने के बाद ही तकरीबन 2 फुट पर ही यह मूर्ति निकल आई थी। जैसे ही भगवान आदिनाथ की मूर्ति मिलने की सूचना जैन समाज के लोगों को मिली तो वह समूह के साथ खुदाई स्थल पर पहुंचे और उन्होंने मूर्ति को जैन समाज को देने की मांग की, लेकिन तत्कालीन कलेक्टर अनुग्रह पी ने कहा कि यह पुरातत्व विभाग का मामला है और हम उससे राय मिलने के बाद ही निर्णय लेंगे।
तब तक इसे संग्रहालय में रखेंगे। चूंकि सांगोपांग प्रतिमा थी और मूर्ति पूजनीय थी। 2 फीट की सीमा के बाहर ही यह मूर्ति निकल आई इस वजह से जैन समाज चाहता था कि कलेक्टर इस मूर्ति को जैन समाज के सुपुर्द करें, ताकि पूजा-अर्चना कर सकें। परंतु दोपहर में पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के आने के बाद यह मूर्तियां जैन समाज के सुपुर्द नहीं हो सकी। तभी प्रशासन और जैन समाज के बीच समझौता हुआ कि मूर्तियां संग्रहालय नहीं ले जा सकते और प्रशासन यदि उसे अपने पजेशन में रखना चाहता है तो उसे किसी दूसरे सुरक्षित स्थान पर रखें। इसके लिए सर्किट हाउस का नाम सुझाया गया लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने सर्किट हाउस की जगह कोतवाली परिसर में मूर्तियों को रखने का निर्णय लिया।
इस पर अंत में जैन समाज की भी सहमति इस बात पर बन गई कि अब कोतवाली में मूर्तियां रखी है तो अंततः जैन समाज को मिल ही जाएंगी। तभी कोरोना के चलते शिवपुरी शहर बंद हो गया और लगातार 2 साल तक यही प्रक्रिया रही। इसके बाद जैन समाज की ओर से आवेदन मूर्तियां प्राप्त करने के लिए कलेक्टर को सौंपा गया इस पर पुरातत्व विभाग के पास पत्र गया लेकिन मूर्तियां वापस नहीं मिली।मूर्तियां अभी भी कोतवाली परिसर के हॉल में रखी हुई है जो पुलिस के पजेशन में और जैन समाज इन्हें खुद के सुपुर्द करने की मांग कर रही है।
कोतवाली में मूर्तियों के दर्शन करने गए तो संत ने देखा आंखें बनाकर मूर्ति पर लगाई और माला भी पहनाई कोतवाली में जब मूर्तियों के दर्शन करने जैन मुनि सुप्रभ सागर और मुनि दर्शित सागर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि मूर्ति पर आंखों के पास कुछ लगा नजर आया। जब उसे छुआ तो पता चला कि भगवान की आंखें बनाकर यहां लगाई गई हैं और इसके साथ वहां कुछ गेंदे के फूल भी पड़े थे जो दर्शा रहे थे कि भगवान को यहां माला भी पहनाई गई है।ऐसे में वहां पदस्थ ए एस आई कैलाश शर्मा से जब पूछा कि यह आंखें और माना किसने पहनाई तो वह जवाब नहीं दे सके इस पर श्री शर्मा ने अपना बचाव करते हुए कहा कि महाराज इस तरह की कोई गलती नहीं होगी इस मूर्ति की पूरी सुरक्षा होगी। तभी सूचना एसपी राजेश सिंह चंदेल को कोतवाली से ही दी गई जिस पर उन्होंने थाना प्रभारी को निर्देश दिए कि वह मूर्ति को पूरा कवर करके रखें ताकि किसी भी तरह से कोई दूसरा व्यक्ति उसे छू ना सके।
किसी को मूर्ति का स्पर्श नहीं करने देंगे
“मूर्ति पर आंखें किसने लगाई और पूजा किसने की यह हमें जानकारी में नहीं है, क्योंकि कुछ लोग यहां पर भगवान के दर्शन करने आए थे, हो सकता है उन्हीं लोगों में से किसी ने लगाई हो, लेकिन महाराज जी से मिले दिशा-निर्देश के बाद अब हम किसी भी तरह से मूर्ति को किसी को स्पर्श नहीं करने देंगे।”
-कैलाश शर्मा, एएसआई कोतवाली थाना शिवपुरी।
मूर्तियां समाज को मिलें
“जैन समाज चाहता है कि मूर्तियां जैन समाज को वापस मिले। 3 साल से जो मूर्तियां थाने में रखी हुई है वह यदि जिनालय में रखी होती तो उनकी पूजा-अर्चना शुरू हो जाती। ऐसे में हम सब की भावना है कि प्रशासन इन मूर्तियों को जैन समाज को सौंपे।”
-राजकुमार जैन जड़ी-बूटी, अध्यक्ष छत्री जैन मंदिर ट्रस्ट कमेटी, शिवपुरी






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