शिवपुरी: जिले के बदरवास ब्लॉक में शुक्रवार को कदंब के पेड़ पर बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची, और पूजा-अर्चना की। यहां वर्षों से देवउठनी एकादशी के दिन कदंब का मेला भराता आ रहा है।
यहां भरता है कदंब का मेला
शिवपुरी जिले के बदरवास के सुमेला गांव में आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर टाटा सर्विस सेंटर के पास स्थित प्राचीन कदम के दो पेड़ है। जहां वर्षों से देवउठनी एकादशी के दिन हजारों की संख्या में महिलाएं पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचती हैं। बदरवास क्षेत्र के लोग ट्रैक्टर ट्राली, कार, बाइक आदि वाहनों से जत्थे के रूप में इकट्ठे होकर कदम के पेड़ पर पहुंचते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। इसी लिए इस स्थान को कई वर्षों से इसे कदंब के मेले के नाम से भी जाना जाने लगा है। यहां कदम के दो पेड़ हैं जो सैंकड़ों वर्ष पुराने हैं। साल दर साल यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। अपनी मनोकामना की पूर्ति की प्रार्थना करने यहां लोग आते हैं और ईश्वर की कृपा सबको प्राप्त होती है। यही बजह रही कि आज फिर एक बार देवउठनी ग्यारस के दिन बड़ी की संख्या में लोग उपस्थित हुए और कदंब के पेड़ की पूजा-अर्चना की है।
गौरतलब है कि भारतीय संस्कृति में कई पेड़-पौधों का महत्व माना जाता है। जिन्हें पूजा भी जाता है। इनमें मुख्यतः केला, तुलसी, पीपल, आंवला, बरगद पेड़-पौधे शामिल है। इनको अलग-अलग पर्वों पर पूजा भी जाता है। परंतु कार्तिक मास में एकादशी के दिन कदंब के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। कार्तिक मास का व्रत रखने वाली महिलाएं ग्यारस के दिन कदम के पेड़ के नीचे हवन पूजन और परिक्रमा करती हैं। कदंब के पेड़ पर मां लक्ष्मी का वास भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि कदंब के पेड़ के नीचे बैठकर यज्ञ करने से मां लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और परिवार में खुशियों का आगमन होता है।






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