शिवपुरी: कोरोना संक्रमण के चलते पिछली बार महज 15 फीट ऊंचे रावण का दहन प्रतीकात्मक रूप से किया गया था। 3 साल बाद अब फिर से 41 फीट ऊंचे रावण के दहन की तैयारी पंजाबी परिषद ने की है। खास बात यह है कि पहली बार रावण दहन के लिए जल मंदिर से निकलने वाले जुलूस में महिलाएं भी शामिल होंगी। पंजाबी समाज के बच्चे इसमें राम-लक्ष्मण और सीता के प्रतीक बनकर झांकियों के रूप में शहर में निकलेंगे। पंजाबी परिषद से जुड़े शहर के वरिष्ठ नागरिक राजीव विरमानी (68) ने बताया कि 1947 में हुए देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान की बन्नू, लकी, ऊकाड़ा और फ्रंटियर एरिया से कई सिख परिवार पाकिस्तान से दिल्ली आ गए।
राजीव विरमानी के दादाजी राम दत्ता मल विरमानी भी उनमें शामिल थे। वह अपने बेटे मुरारीलाल विरमानी के साथ पहले पाकिस्तान से दिल्ली पहुंचे और फिर वहां से निकटतम रिश्तेदार डॉ डीसी चौधरी और डॉक्टर राजेंद्र नाथ ढींगरा के कहने पर शिवपुरी आ गए। यहां सेवा कार्य कर समाजसेवियों से जुड़े और फिर पंजाबी परिषद द्वारा अब से तकरीबन 70 साल पहले रावण दहन की शुरुआत की गई। तब से लेकर अब तक कोरोना के सिर्फ 2 साल छोड़ दे तो हर साल रावण का दहन पंजाबी परिषद द्वारा किया गया।
पंजाबी परिषद के अध्यक्ष सुनील भुगड़ा ने बताया कि बुधवार को विजयादशमी के अवसर पर दोपहर 4 बजे से जल मंदिर से रावण दहन के लिए जुलूस निकलेगा, जिसमें पहली बार समाज की महिलाएं भी जुलूस में शामिल रहेंगी।
बच्चों को संस्कृति से परिचित कराने राम, लक्ष्मण और सीता का पात्र बनाया जाएगा
खास बात यह है कि अब तक चुनिंदा पात्र ही राम-लक्ष्मण बनकर रावण का दहन करते थे, लेकिन इस बार समाज के बच्चों में भी यह संस्कार जागृत हो इसलिए उन्हें राम, लक्ष्मण और सीता का पात्र बनाया जाएगा। जुलूस ठीक 7 बजे सिद्धेश्वर मेला ग्राउंड में पहुंचेगा जहां अतिथियों द्वारा कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। फिर 7:30 बजे रावण का दहन होगा। खास बात यह भी है कि इस बार उरई से ढोल वालों को बुलाया गया है।जो भांगड़े के साथ-साथ आकर्षक वेशभूषा और परिधान में सज कर पंजाबी धुनों के साथ दिव्य घोष वादन करते हुए जुलूस का आकर्षण रहेंगे। इसके साथ ही कालीमाई माता मंदिर के पास भी रावण का दहन रात 8:30 बजे से होगा।






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