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56 करोड़ पानी में बहे लेकिन फिर भी नहीं आया पानी अब 83 करोड़ खर्च करेंगे / Shivpuri News

शिवपुरी: सिंध जलावर्धन योजना के तहत मडीखेड़ा बांध से शिवपुरी तक पानी लाने के लिए जीआरपी बिछाई लाइन पर 56 करोड़ पहले ही बर्बाद हो चुके हैं। अब इस लाइन की जगह डीआई लाइन बिछाने का प्लान तैयार किया गया है। इसके साथ 4 टंकी और 158 किलोमीटर डिस्ट्रीब्यूशन लाइन बिछाने का काम भी शामिल है। इस काम पर तकरीबन 100 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके लिए अमृत-2 के तहत राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। यदि राज्य तकनीकी परिषद से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई तो शहर में पानी की समस्या खत्म हो सकती है।

सिंध जलावर्धन योजना के तहत दोशियान कंपनी को 56 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। पाइप लाइन में गड़बड़ी और अन्य अनियमितताओं के चलते कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर जमा राशि तीन करोड़ रुपए को राजसात कर दिया गया है। तीन साल गुजर जाने के बावजूद अब तक नए सिरे से पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू नहीं हो सका। ऐसे में सतनवाड़ा से लेकर मडीखेड़ा डैम तक 13.70 किलोमीटर हिस्सा और सतनवाड़ा से लेकर ग्वालियर बायपास तक 8.70 किलोमीटर हिस्से में डीआई पाइप लाइन बिछाने की प्लानिंग की गई है। डीआई पाइप सीमेंट और आयरन से मिलकर बना होता है, जिससे पाइप क्षतिग्रस्त होने की आशंका न के बराबर रहेगी।

अमृत-2 में यह काम होंगे
डीआई पाइप लाइन को बिछाने पर तकरीबन ₹68 करोड़ रुपए खर्च होंगे जबकि शहर में पानी की सप्लाई सिंध पाइप लाइन से ठीक से हो सके, इसके लिए 4 टंकी अभी बनाई जानी है। जिनमें कटमई, महावीर स्वामी मार्ग कोर्ट रोड, बीज गोदाम और पुरानी शिवपुरी स्थित सुभाष पार्क का हिस्सा शामिल है। यहां पानी की टंकी बनाए जाने पर तकरीबन 3 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इन टंकियों का बनाने का फायदा यह होगा कि ऊंचाई पर रहने वाले घरों में पानी ना पहुंचने की समस्या से लोगों को निजात मिलेगी। इसके अलावा शहर के 158 किलोमीटर हिस्से में डिस्ट्रीब्यूशन लाइन बिछाई जाएगी। इसका सर्वे पहले किया जा चुका है। ऐसा हो जाने से शहर के चीलोद, सब्जी मंडी, शंकर कॉलोनी, नाई की बगिया सहित जहां पर अब तक डिस्ट्रीब्यूशन लाइन नहीं बिछाई है, वहां के वाशिंदों को पानी मिलने की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा।

अमृत-2 के तहत भेजा प्रस्ताव, अभी लग सकते हैं 4 महीने
फिलहाल 100 करोड़ रुपए का जो प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया है, उसकी एसएलटीसी अर्थात राज्यस्तरीय तकनीकी परिषद से स्वीकृत आवश्यक है। इसके बाद ही नगर पालिका डीपीआर तय कर टेंडर करेगी। फिर परिषद में स्वीकृति के लिए प्रस्ताव जाएगा। परिषद में स्वीकृति मिलने के बाद वापस राज्य शासन के पास प्रस्ताव पहुंचेगा और फिर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद यह अमल में आ सकेगा। कुल मिलाकर इस पूरी प्रक्रिया में 3 महीने से अधिक का समय लग सकता है, और इस काम की शुरुआत अब नए साल 2023 के जनवरी या फरवरी माह से पहले शुरू होने की संभावना बहुत कम हैं।

स्वीकृति के बाद होगा काम
“सिंध जलावर्धन योजना के शेष काम के लिए अमृत-2 में तकरीबन 100 करोड़ के काम स्वीकृत हुए हैं। भोपाल में एसएलटीसी बैठक के बाद स्वीकृति मिलते ही जल्द काम शुरू हो जाएगा।”
-शैलेश अवस्थी , सीएमओ, नगर पालिका शिवपुरी

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