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कुटीर दिलवाने के बहाने बेटी ने बेच दी माँ की ज़मीन / Shivpuri News

खनियांधाना ब्लॉक के ग्राम चमरौआ में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला ने अपनी ही बेटी पर कुटीर के पैसे निकलवाने के बहाने तीन बीघा जमीन की धोखे से रजिस्ट्री करने के आरोप लगाए हैं। जानकारी के आनुसार बुजुर्ग विधवा महिला दुर्गया जाटव निवासी चमरौआ ने बताया कि मुझे मेरी बेटी फूला जाटव निवासी मादौन ने बैंक व जनपद ले जाने की बात कहकर घर से मुझे ले गई और साजिश के तहत मुझसे वेरीफिकेशन कराने के नाम पर रजिस्ट्रार कार्यालय ले जाकर तीन बीघा जमीन की धोखे से रजिस्ट्री करवा ली है।

महिला का आरोप है कि बेटी ने पिता की संपत्ति में से अपना हिस्सा लेने के बाद भी मेरे हिस्से की जमीन को कुटीर निकली है, उसका वेरीफिकेशन कराने के लिए आपको ऑफिस चलना हैं, तब आपके पैसे निकले की बात कहकर साथ ले आई और वहां मादौन निवासी बलबीर जाटव प नीरज जाटव के नाम रजिस्ट्री करवा दी हैं। बुजुर्ग महिला दुर्गया जाटव ने बताया है कि मुझे मेरी बेटी बैंक व जनपद ले जाने के बहाने मुझे रजिस्ट्रार कार्यालय ले गई। जहां उसने मेरी हिस्से की भूमि की रजिस्ट्री करवा दी है।

उसका कहना है कि यदि रजिस्ट्रार संदीप पांडेय रजिस्ट्री के दौरान मुझसे जमीन क्रय-विक्रेक के लिए कोई पूछताछ करते तो मेरे से रजिस्ट्री कराने में धोखा नहीं होता। लेकिन रजिस्ट्री के दौरान उन्होंने कुछ भी पूछताछ नहीं की और हस्ताक्षर कराकर रजिस्ट्री करा दी। खासबात यह है कि नियमानुसार कोई व्यक्ति रजिस्ट्री कराने के लिए कार्यालय जाता हैं तो रजिस्ट्री के दौरान रजिस्ट्रार द्वारा हस्ताक्षर व फोटो वेरीफिकेशन कराने के पहले जमीन संबंधी जानकारी विक्रेता से ली जाती हैं और पूछा जाता है कि आपके द्वारा कितनी जमीन बेची जा रही हैं और यह कहां पर स्थित हैं और इसको विक्रय करने पर आपको राशि प्राप्त हुई या नहीं।

यदि प्राप्त कर ली है तो कितनी राशि प्राप्त कर ली है। ऐसी कोई ओपचारिकता रजिस्ट्रार कार्यालय में अधिकारी नहीं कर रहे हैं। इससे इस रजिस्ट्री प्रकरण में अधिकारी की भूमिका संदिग्ध आ रही है।

दर-दर की ठोकरें खा रही हूं
“मेरे जीवन निर्वाह के लिए मात्र 3 बीघा जमीन थी, वह सहारा भी स्वयं की बेटी ने सरकार के नुमांइदों से मिलकर छीन लिया। अब दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हूं।”
दुर्गया जाटव , बुजुर्ग महिला

पीड़िता को कोर्ट जाना होगा
“पीड़िता का आवेदन प्राप्त हुआ हैं, उनको पहले रजिस्ट्री पर रोक लगवाने के लिए न्यायालय जाने का कहा गया हैं, ताकि नामांतरण न हो सके।”
रुचि अग्रवाल , तहसीलदार, खनियांधाना

आरोप निराधार है
“मेरे द्वारा रजिस्ट्री के समय संबधित क्रेता-विक्रेता से सभी औपचारिक पूछताछ की गई थी, आरोप निराधार हैं।”
-संदीप पांडेय, उप पंजीयक खनियांधाना

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