शिवपुरी: कोलारस के ग्राम देहरदा गणेश में बप्पा की विदाई का भंडारा खाने के कारण दर्जनों ग्रामीण बीमार हो गए। उन्हें भंडारे के बाद से उल्टी दस्त की शिकायत है। कई आदिवासी ग्रामीणों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई ग्रामीणों को गांव में ही उपचार प्रदान करने के लिए मंगलवार को स्वास्थ्य कैंप का आयोजन किया गया। अस्पताल में भर्ती मरीजों का आरोप है कि उनसे डाक्टरों ने इलाज के बदले फीस वसूली है और बाजार की दवाएं लिखी हैं। इसके अलावा तीन दिन से उन्हें खाना तक नहीं दिया गया है।
जानकारी के अनुसार ग्राम देहरदा गणेश में ग्रामीणों ने गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणपति की स्थापना की थी। बप्पा की विदाई पर गांव वालों ने पूजा अर्चना कर 10 सितंबर को भंडारे का आयोजन किया। भंडारे में गांव वाालों ने खाना खाया। खाना खाने के बाद अचानक गांव वालों की तबीयत खराब होना शुरू हो गई। दर्जनों लोगों को उल्टी दस्त होने लगे। कुछ गांव वालों ने तो गांव के डाक्टरों से ही इलाज कराया तो कुछ कोलारस स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। कोलारस में करीब आधा दर्जन ग्रामीणों को 11 सितंबर को गंभीर हालत के चलते भर्ती किया गया है, जिनमें छोटा आदिवासी उम्र 22 साल, ललन सिंह उम्र 20 साल, पदम आदिवासी उम्र 30 साल, ललन आदिवासी उम्र 20 साल, राजेश आदिवासी उम्र 17 साल, जसरथ आदिवासी उम्र 22 साल, ओम प्रकाश आदिवासी उम्र 24 साल शामिल हैं। गांव में मरीजो की बढ़ती संख्या के चलते मंगलवार को स्वास्थ्य महकमे ने गांव में स्वास्थ्य कैंप का आयोजन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में भी डाक्टरों ने उनसे इलाज करने के बदले पैसे लिए हैं। इसके अलावा उन्हें सरकारी दवाएं नहीं दी गई, उनसे बाजार से दवाएं मंगाई गई हैं। उनका कहना है कि वह तीन दिन से यहां भर्ती हैं, लेकिन उन्हें आज तक एक बार भी खाना नहीं दिया गया। मंगलवार को सिर्फ दलिया देने की बात आदिवासी मरीजों द्वारा बताई गई है। कुल मिलाकर सरकार इस तबके के लोगों को नि:शुल्क शिक्षा, नि:शुल्क चिकित्सा और नि:शुल्क खाना मुहैया कराने के लिए उचित मूल्य की दुकानों से मुफ्त में राशन प्रदान कर रही है। अस्पताल में इन्हें पोषण की कमी न हो इसके लिए वहां भी नि:शुल्क खाना मुहैया कराया जा रहा है, लेकिन कोलारस अस्पताल में इन लोगों से बाजार से दवाएं मंगाना, शासन द्वारा दिया जा रहा नि:शुल्क भोजन उपलब्ध न करवाना और इलाज के नाम पर फीस वसूलना कहीं न कहीं मानवता को शर्मसार करने के साथ-साथ नियमों को धता बताने वाला है। इस मामले में अधिकारियों द्वारा जांच कराए जाने और जांच उपरांत उचित कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है। इस पूरे मामले में जब सीएमएचओ डा पवन जैन को फोन लगाए गए तो उन्होंने फोन तक अटैंड नहीं किए और वाट्सएप मैसेज पर भी उनसे मामले में उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने वहां पर भी जबाब नहीं दिया।
ये बोले ग्रामीण
यहां से सिर्फ बोलत मिल रही है, दवाएं, नली सब कुछ बाजार से लाना पड़ रहा है। हमें अस्पताल से खाना नहीं मिल रहा, खाना गांव से मंगाना पड़ रहा है। आज शाम को सिर्फ दलिया दिया है। अस्पताल से अभी तक कोई दवाई हमें नहीं दी गई है।
रामकली आदिवासी
मरीज की मां
हम आए तो डाक्टर ने हमसे पैसे लिए और कहा कि पैसे दोगे तो ही इलाज होगा नहीं तो अस्पताल में इलाज नहीं हो पाएगा। इसलिए हमें डाक्टर के यहां पर पैसे जमा किए थे। उसी के बाद हमें अस्पताल में भर्ती किया गया है।
सखी आदिवासी
मरीज की मां
ये बोेले जिम्मेदार
यह बात शाम को मेरे संज्ञान में आई थी तो मैं खुद अस्पताल में राउंड लेने गए था। हमारे यहां पर्याप्त दवाएं हैं, बाजार से दवा मंगवाने की कोई जरूरत ही नहीं है। इसके बाबजूद मैंने उनको कहा है कि आप पर अगर कोई पर्ची बगैरा है तो आप हमें उपलब्ध करवाएं। हम पूरे मामले को संज्ञान में लेंगे और जांच उपरांत मामले में किसी डाक्टर द्वारा फीस लेने की अथवा बाजार से दवा मंगवाने की बात सामने आती है तो हम मामले में उचित कार्रवाई भी करेंगे।
डा नरेंद्र दांगी
बीएमओ कोलारस






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