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कर्म ही सर्वोपरि है, जैसी करनी-वैसी भरनी: पं वासुदेव महाराज / Shivpuri News

शिवपुरी: प्रसिद्ध संत श्री श्री 1008 श्री सियाराम महाराज के ब्रह्मलीन होने पर उनके आश्रम कुंडा सरकार हनुमान मंदिर कोलारस पर चल रही संगीतमय श्रीरामकथा के पांचवे दिन उपस्थित भक्तगणों को कथा व्यास पं. श्री वासुदेव महाराज ने कथा सुनाते हुए कहा कि मानव जीवन में कर्म ही श्रेष्ठ है। कर्म के फल तो स्वयं परमेश्वर के पिता को भी भुगतने पड़े।प्रभु श्रीराम के वनगमन के पश्चात वियोग में जब उनके पिता राजा दशरथ की तबियत बिगड़ने लगी तो उन्होंने रानी कौशल्या को कहा कि मुझे दीवार पर श्रवण कुमार के माता पिता दिखाई दे रहे हैं। राजा दशरथ जी को श्रवण कुमार के माता पिता ने अपने अंतिम समय में श्राप दिया था कि हे राजन जिस प्रकार हम बूढ़े माँबाप अपने पुत्र के वियोग में प्राण त्याग रहे हैं वैसे ही तुम भी अपने प्राणों का त्याग पुत्र के वियोग में ही करोगे और वैसा ही हुआ।जब राजा दशरथ ने प्राण त्यागे तो अंतिम समय में उनके एक भी पुत्र उनके पास नहीं थे, दो पुत्र वन गए थे तो दो पुत्र ननिहाल में।कर्म का यही नियम है कि वो फल दिए बिना रह ही नही सकता।इसीलिए तुलसीदास जी ने कहा है कि कर्म प्रधान विश्व कर राखा,जो जस करहिं सो तस फल चाखा विदित हो कि आश्रम के भक्तमण्डल द्वारा श्रीरामकथा का आयोजन किया गया है।पांचवे दिन की कथा समापन पर भक्तगणों द्वारा सामूहिक आरती की गई ततपश्चात प्रसाद वितरण संपन्न हुआ।

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