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सेटेलाइट स्कूल के शिक्षकों पर बच्चों के साथ छुआछूत एवं विद्यालय की साफ सफाई करवाने जैसे लगे गंभीर आरोप / Shivpuri News

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा स्कूली नन्हे-मुन्ने बच्चों का भविष्य

शिक्षा के अधिकार से वंचित गरीब परिवारों के सैकड़ों बच्चे

गंदगी में बिठाया जाता है नन्हे मुन्ने बच्चों को

खनियांधाना शिवकांत सोनी: केंद्र शासन एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जहां एक और शिक्षा के अधिकार को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर यह वादे और दावे खोखले नजर आते हैं ताजा मामला शिवपुरी जिले के अंतर्गत आने वाली सबसे बड़ी तहसील खनियाधाना के वार्ड नंबर 8 के नीम तलैया क्षेत्र से है जहां गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा प्राप्त हो सके इसके लिए एक सेटेलाइट विद्यालय की व्यवस्था मध्यप्रदेश शासन द्वारा की गई थी लेकिन वहां पदस्थ स्कूल प्रभारी व शिक्षकों की मनमानी की वजह से यह विद्यालय बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता नजर आ रहा है ताजा मामला सेटेलाइट स्कूल नीम तलैया का है जहां पर स्कूल प्रभारी सीमा जैन व शिक्षकों के द्वारा स्कूली नन्हे-मुन्ने बच्चों को बैठने के लिए उचित जगह नहीं होने के कारण नन्हे-मुन्ने बच्चों को गंदगी बा घास फूस में खुले आसमान के नीचे बैठना पड़ता है आपको बता दें की यहां मध्यप्रदेश शासन ने स्कूल तो स्थापित कर दिया पर कई वर्षों तक धरातल पर स्कूल गायब रहा वार्ड वासियों ने मिलजुल कर स्कूल के लिए जमीन दान में दी अब उस जमीन पर शासन के द्वारा स्कूल बनाने के लिए राशि आई तो स्कूल बनना प्रारंभ हुआ पर स्कूल प्रभारी सीमा जैन ने स्कूल की राशि में झोलझाल करके राशि आहरित कर ली और स्कूल का निर्माण कार्य अधूरा रह गया अब यहां पर नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए स्कूल तो है पर निर्माण अधूरा होने के कारण नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए खुले आसमान के नीचे गंदगी एवं घास फूस में बैठना पड़ रहा है जब इस संबंध में हमारी टीम के द्वारा स्थानीय लोगों से बात की तो स्थानीय लोगों ने स्कूल प्रभारी सीमा जैन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया है कि स्कूल बनने के लिए जो राशि आई थी वह स्कूल प्रभारी के द्वारा गोलमाल करके आहरण कर ली गई और ठेकेदार को बिल्डिंग बनाने के लिए राशि नहीं दी गई स्थिति इतनी दयनीय है कि नन्हे-मुन्ने बच्चों को बैठने के लिए टाट पट्टी ब्लैक बोर्ड स्वच्छ पीने का पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है अब यहां पर नन्हे मुन्ने बच्चे विद्यालय में पढ़ने आते हैं तो अपने घर से बैठने के लिए बोरिया लाते हैं और उन्हीं बोरियों पर बच्चे गंदगी एवं घास फूस में बैठने को मजबूर हो रहे हैं विद्यालय में पढ़ने आने वाले छात्र-छात्राएं दलित एवं गरीब परिवारों से है जिनके साथ शिक्षकों द्वारा छुआछूत का भेदभाव किया जाता है ऐसे गंभीर आरोप भी पालकों द्वारा लगाए गए हैं.

स्कूल मैं छात्र छात्राओं से ही करवाई जाती है स्कूल की सफाई
सैटेलाइट प्राथमिक विद्यालय में किसी भी सफाई कर्मी की पदस्थापना नहीं है जिसकी वजह से स्कूल प्रभारी शिक्षिका एवं अन्य शिक्षकों द्वारा विद्यालय में पढ़ने आने वाले छात्र-छात्राओं से ही विद्यालय की सफाई करवाई जाती है यदि छात्र छात्राओं के पालको द्वारा इसकी शिकायत की जाती है तब स्कूल प्रबंधन द्वारा उल्टे सीधे जवाब देकर पालकों को चुप करा दिया जाता है और शिक्षा के नाम पर नन्हे-मुन्ने बच्चों का शोषण लगातार किया जा रहा है

विद्यालय में समय पर नहीं आते शिक्षक
सभी शासकीय विद्यालयों पर शिक्षकों के पहुंचने का एक निर्धारित समय है परंतु नीमतलेया स्थित सैटेलाइट प्राथमिक विद्यालय मैं पदस्य शिक्षकों पर शायद कोई भी नियम लागू नहीं होते हैं इसकी वजह से कोई भी शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचता जिसकी बजह से विद्यालय समय पर पहुंचने वाले छात्र-छात्राएं यहां वहां भटकते रहते हैं जिसकी वजह से विद्यालय जाने वाले छात्र-छात्राओं के पालकों ने बच्चों को विद्यालय भेजना भी बंद कर दिया है.

मजबूरन प्राइवेट स्कूलों में करवाना पड़ रहे हैं एडमिशन
नीम तलेया स्थित सैटेलाइट विद्यालय की स्थापना करने का मुख्य कारण था कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चों को भी उचित शिक्षा मिल सके मनमानी की वजह से नन्हे-मुन्ने बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है बच्चों के भविष्य की चिंता में पालकों द्वारा मजबूरन प्राइवेट विद्यालयों में अपने बच्चों का एडमिशन करवाना पड़ रहा है प्राइवेट विद्यालयों की मोटी मोटी फीस जमा करने के लिए छात्र-छात्राओं के माता-पिता को विषम परिस्थितियों में मजदूरी करके प्राइवेट विद्यालयों की फीस जमा करनी पड़ रही है जिसकी वजह से प्रशासन के शिक्षा के अधिकार जैसे झूठे वादे खोखले नजर आ रहे हैं

शिक्षकों द्वारा अपने ही पति के खाते में डाले जाते रहे हैं रसोईया के पैसे
सेटेलाइट विद्यालय में मध्यान भोजन बनाने के लिए 2 रसोइयों की पदस्थापना विद्यालय प्रबंधन द्वारा की गई थी जिसमें रसोइयों को दिए जाने वाला पारिश्रमिक विद्यालय की शिक्षिका द्वारा अपने पति के बैंक खाते में पिछले 9 सालों से डाला जा रहा है जांच का विषय यह है कि धरातल पर दो रसोइए दर्शाए जा रहे हैं जबकि पालक एवं छात्र छात्राओं द्वारा रसोइयों के होने से साफ-साफ इंकार किया जा रहा है शिक्षिका सीमा जैन द्वारा अपने पति राजेश जैन के भारतीय स्टेट बैंक में स्थित खाता क्रमांक =53035138174 मैं रसोइयों को प्रदान करने वाली राशि डाली जाती रही है और जांच का विषय है पालकों द्वारा आरटीआई के माध्यम से इस विषय की जांच करने का निवेदन भी किया गया है.

इन सभी विषयों को लेकर छात्र-छात्राओं के माता-पिता द्वारा कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी दर्ज कराई गई परंतु आला अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर शिक्षिका द्वारा सभी शिकायतों को बंद करवा दिया गया और भविष्य में शिकायत करने पर छात्र छात्राओं को विद्यालय से निष्कासित करने जैसी धमकियां भी दी गई अब देखना यह है कि नन्हे-मुन्ने बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इन शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही करने कोई शिक्षा विभाग का आल्हा अधिकारी या जनप्रतिनिधि तैयार होता है या नहीं यह विचारणीय विषय है.

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