खनियाधाना शिवकांत सोनी:- क्षेत्रीय विकास की दौड़ में चंदेरी और करेरा के लिए रेलवे लाइन का सर्वे शुरू होना निस्संदेह एक अच्छी खबर है लेकिन इस योजना से पिछोर और अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की कर्मस्थली खनियाधाना जैसे प्रमुख व्यापारिक और ऐतिहासिक केंद्रों का नाम गायब होने से स्थानीय नागरिकों में भारी निराशा है वर्तमान सर्वे के अनुसार रेलवे लाइन इन दोनों बड़े कस्बों को स्पर्श नहीं कर रही है जिसे क्षेत्र के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जा रहा है
*राजनीतिक भेदभाव भूलकर एकजुट होने का समय* :-
खनियांधाना निवासी संजय शर्मा संजू महाराज का कहना है कि पिछले कई दशकों से पिछोर और खनियाधाना की जनता रेल सुविधा की आस लगाय है विडंबना यह है कि जब धरातल पर काम शुरू होने की सुगबुगाहट हुई तो इन क्षेत्रों को योजना से बाहर कर दिया गया अब समय आ गया है कि क्षेत्र के सभी राजनीतिक दल सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि अपनी विचारधाराओं और आपसी मतभेदों को किनारे रखकर एक स्वर में रेल की मांग बुलंद करें
*क्यों जरूरी है पिछोर-खनियाधाना में रेल*:-
व्यापारिक केंद्र पिछोर और खनियाधाना अनाज मंडी और व्यापार के लिहाज से जिले के महत्वपूर्ण केंद्र हैं रेल लाइन जुड़ने से यहाँ के व्यापार को नया विस्तार मिलेगा
*रोजगार और पलायन* :- रेल सुविधा न होने से क्षेत्र के युवा पलायन को मजबूर हैं औद्योगिक विकास के लिए रेलवे पहली प्राथमिकता है
*खनिज संपदा* :- इस क्षेत्र में खनिज संपदा की प्रचुरता है जिसे सुगम परिवहन मिलने से राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी
*पर्यटन एबं जैन तीर्थ* :- खनियाधाना का ऐतिहासिक महत्व और जैन तीर्थ गोलकोट व आसपास की प्राकृतिक सुंदरता रेल मार्ग से जुड़ने पर पर्यटन मानचित्र पर उभर सकता है
*जनता की हुंकार हक के लिए लड़ेंगे* :-
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे किसी क्षेत्र के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन पिछोर-खनियाधाना की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी क्षेत्र की मांग है कि प्रस्तावित सर्वे में संशोधन कर इसे चंदेरी-खनियाधाना-पिछोर-करेरा रूट पर केंद्रित किया जाए ताकि इस पूरे अंचल का सर्वांगीण विकास हो सके रेलवे लाइन केवल पटरी का जाल नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की जीवन रेखा है यदि आज हम चुप रहे तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी
*स्थानीय संघर्ष समिति* :- यह समय श्रेय की राजनीति का नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास का है यदि आज पिछोर और खनियाधाना के लिए आवाज नहीं उठाई गई तो विकास की यह ट्रेन हमारे दरवाजे से निकल जाएगी और हम केवल हाथ मलते रह जाएंगे प्रशासन और सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस सर्वे का विस्तार करना ही चाहिए







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