
शिवपुरी। फास्ट समाचार द्वारा लगभग 10 दिन पहले वन विभाग के भ्रष्टाचार के संबंध में खबर प्रकाशित की थी जिसमें एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा वन विभाग के रेंजर से आरटीआई का आवेदन देकर वन विभाग द्वारा बड़ागांव बीट में कराए प्लांटेशन की जानकारी तथा उस पर खर्च की गई शासकीय राशि की जानकारी चाही गई थी, परंतु वन विभाग के अधिकारी द्वारा अपने कर्मचारियों को बचाने के लिए रेंजर द्वारा आरटीआई काय्रकर्ता को लोकहित का हवाला देकर जानकारी प्रदान करने से मना कर दिया गया। क्या शाासकीय राशि का दुरूपयोग लोकहित से बाहर है यह तो रेंजर साहब ही बता सकते हैं कि क्या शाासकीय पैसा का कोई दुरूपयोग करता रहे और रेंजर उस घोटाले का लोकहित का हवाला देकर दबाते रहें। जबकि शासकीय पैसा जनता का ही पैसा है और जनता शासन द्वारा खर्च किए अपने पैसे का हिसाब क्यों नहीं मांग सकती। वन विभाग द्वारा प्लांटेशन की बाउंटीबॉल के पत्थर और गेट तथा वैध अवैध खंडे, बोल्डरों का वन विभाग की भूमि से निरंतर खनन हो रहा है। वन विभाग की भूमि पर वैध चरागाह बनाकर ग्रामीणों से वसूली की जा रही है और वन विभाग के वरिश्ठ कर्मचारी मूक दर्शक बने हुए हैं। इतना ही नहीं इस भ्रष्टाचार में वरिष्ठ कर्मचारी भी शामिल हैं। वन विभाग की भूमि पर जो बोर का खनन हुआ है वह अवैध है या बैध है इसकी भी जानकारी वन विभाग के अधिकारियों द्वारा छिपाई जा रही है। रेंजर द्वारा अपने कर्मचारियों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और दोषी कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।






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