करैरा। फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन हड़पने के प्रयास के मामले में करैरा न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती मोनिका आध्या ने आरोपी ओबेदुल्ला उर्फ बॉबी और दिर्गपाल सिंह बुंदेला को दोषी ठहराते हुए क्रमशः 5 वर्ष व 7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर तीन हजार व दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला करैरा क्षेत्र के लोटनपुरा टीला रोड स्थित जमीन से जुड़ा है। इस मामले में मरोड़ीपुरा निवासी सफीउल्लाह खान द्वारा न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया था। परिवाद में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने आपसी साजिश कर जमीन के संबंध में फर्जी मुख्तियारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) तैयार किया और उसके आधार पर जमीन से संबंधित कार्यों में लाभ लेने का प्रयास किया।
मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता हर्षवर्धन दुबे, अधिवक्ता विनोद धाकड़ और अधिवक्ता अतुल भार्गव ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। उन्होंने दस्तावेजी साक्ष्य और कानूनी तथ्यों को विस्तार से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उन्हें असली बताकर उपयोग करने का प्रयास किया।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (महत्वपूर्ण दस्तावेज की जालसाजी) एवं धारा 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) के तहत दोषी ठहराया।
बताया जाता है कि इस मामले का मुख्य आरोपी ओबेदुल्ला उर्फ बॉबी करैरा के फूटे तालाब क्षेत्र में अमन पैथोलॉजी लैब संचालित करता है।
न्यायालय के इस फैसले को क्षेत्र में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। परिवादी सफीउल्लाह खान ने न्यायालय के निर्णय पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आज सत्य की जीत हुई है।







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