शिवपुरी: शासन-प्रशासन पशुपालन और गौसंरक्षण के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बैराड़ के पशु चिकित्सालय में एक गंभीर रूप से बीमार बछड़ा इलाज के इंतजार में तड़पता रहा और दोपहर तीन बजे तक अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। गौसेवक जब बछड़े को लेकर अस्पताल पहुंचे तो वहां सन्नाटा पसरा था। आरोप है कि मौजूद कर्मचारी प्रेमी शाक्य से डॉक्टर के बारे में पूछने पर उसने कथित रूप से असंवेदनशील जवाब दिया कि बछड़ा मरे तो मर जाए, डॉक्टर खाना खाने नहीं जाएंगे क्या? इस कथन ने न सिर्फ गौसेवकों बल्कि स्थानीय नागरिकों में भी गहरा आक्रोश पैदा कर दिया।
लोगो का कहना है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं, बल्कि यहां की रोजमर्रा की हकीकत है। पशु चिकित्सा विभाग मध्य प्रदेश के अधीन संचालित इस चिकित्सालय में अक्सर डॉक्टरों की अनुपस्थिति बनी रहती है। कई बार पशुपालक घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन इलाज समय पर नहीं मिल पाता। अस्पताल भवन की स्थिति जर्जर बताई जा रही है, दवाइयों की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और जिम्मेदारी तय करने वाला कोई नजर नहीं आता। पशुपालकों का कहना है कि जब इंसानों के अस्पतालों में इतनी लापरवाही पर कार्रवाई होती है, तो पशु चिकित्सालयों में आखिर जवाबदेही क्यों नहीं?
बैराड़ पांच पद स्वीकृत, दो डॉक्टर तैनात: स्टाफ की कमी का बहाना या व्यवस्था की नाकामी…..
इस पूरे मामले में पशु चिकित्सक अधिकारी डॉ. अतुल राजपूत ने सफाई देते हुए बताया कि बैराड़ सहित कुल 12 संस्थाओं में पांच डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो ही डॉक्टर कार्यरत हैं। अतिरिक्त प्रभार और फील्ड ड्यूटी के चलते हर समय सभी केंद्रों पर उपलब्ध रहना संभव नहीं हो पाता। बैराड़ का अतिरिक्त प्रभार डॉ. वीनस राजपूत के पास है और अन्य पद रिक्त हैं। उन्होंने माना कि स्टाफ की कमी के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। हालांकि सवाल यह है कि जब वर्षों से पद रिक्त हैं तो उनकी पूर्ति के लिए ठोस पहल क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।







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