शिवपुरी। बांधवगढ़ से शिवपुरी लाई गई मादा टाइगर ने माधव टाइगर रिजर्व क्षेत्र के आसपास के गांव में दहशत फैला रखी है। मादा टाइगर आए दिन किसी ने किसी गांव में घुस रही है, जिसके कारण ग्रामीण इस हद तक दहशत में आ गए हैं कि न तो वह अपने घरों से निकलते समय खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और न ही अपने खेतों पर जा पा रहे हैं। इसी क्रम में रविवार को मादा टाइगर मोहम्मदपुर गांव में घुस गई। टाइगर ने एक गाय और एक बछड़े का शिकार कर लिया।
जानकारी के अनुसार रविवार की सुबह करीब आठ बजे मोहम्मदपुर खुटेला गांव में सब कुछ सामान्य चल रहा था। गांव के लोग सुबह-सुबह हैंडपंप पर पानी भरने के लिए गए तो उन्हें गांव में मादा टाइगर एमटी-6 घूमती हुई नजर आई। मादा टाइगर ने गांव में एक बछड़े और एक गाय का शिकार भर कर लिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जब हैंडपंप के पास मादा टाइगर को देखा तो वहां से भाग कर किसी तरह अपनी जान बचाई। माना जा रहा है कि मादा टाइगर ग्रामीणों को देख नहीं पाई होगी, अन्यथा उनका बचना मुश्किल था। यहां बताना होगा कि इस मादा टाइगर ने 1 जनवरी को डोंगर गांव में 65 वर्षीय शिवलाल पाल पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। इसके बाद ग्राम सरदारपुर में मादा टाइगर कैमरे में कैद हुई। उक्त गांव में भी टाइगर ने शिकार किया। दो दिन पहले यह टाइगर सुरवाया में भी दिखाई दी थी। इसके बाद टाइगर फोरलेन हाईवे क्रास करके मोहम्मदपुर खुटैला की तरफ कूच गई। इसी क्रम में रविवार की सुबह उसने गांव में गाय और बछड़ का शिकार किया।
सरसों के खेत में छिपने पर समझ नहीं आ रही
ग्रामीणों की मानें तो जैसे ही गांव में हलचल बढ़ी तो मादा टाइगर भाग कर सरसों के खेत में जाकर छिप गई। सरसों के पीले खेत में छिप कर बैठी मादा टाइगर और सरसों का रंग लगभग एक जैसा होने के कारण वह समझ भी नहीं आ रही थी। ऐसे में किसी दिन यह टाइगर किसी ग्रामीण को भी अपना ग्रास बना सकती है। आदिवासी गांवों में मादा टाइगर का आतंक बढ़ने के चलते सहरिया क्रांति के कार्यकर्ताओं ने फारेस्ट के कर्मचारियों को आज स्पष्ट रूप से कहा कि अगर टाइगर को काबू करके जंगल में नहीं ले जाया गया तो उन्हें इसके विरूद्ध आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।









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