शिवपुरी:पोहरी अनुबिभाग के भैंसरावन पंचायत क्षेत्र में कुपोषण का मामला अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि एक बार फिर महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब पांच माह पहले एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में भर्ती कराए गए 14 कुपोषित बच्चों का मामला शांत ही हुआ था कि अब भैंसरावन पंचायत के आदिवासी गांव पटेलपुरा में एक तीन वर्षीय बच्ची के गंभीर कुपोषण का मामला सामने आया है, जिससे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।
सूत्रों के अनुसार पटेलपुरा आदिवासी बस्ती में सिर्फ एक नहीं बल्कि कई अन्य बच्चे भी कुपोषण के शिकार हैं। इसके बावजूद महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नियमित मॉनिटरिंग और समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया, जिससे स्थिति और गंभीर होती नजर आ रही है।
पीड़ित बच्ची के पिता लखवेन्द्रर आदिवासी एवं माता फोरंदी आदिवासी ने बताया कि उनकी तीन साल की बच्ची लंबे समय से कुपोषण से जूझ रही है। बच्ची का इलाज कराहल अस्पताल सहित श्योपुर अस्पताल तक कराया गया, लेकिन अब तक स्वास्थ्य में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
परिजनों का आरोप है कि जब वे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पास पहुंचे तो सिर्फ “भर्ती कराने” की बात कही गई, लेकिन आज तक बच्ची को न तो पोषण आहार मिला और न ही शासन की किसी योजना का लाभ दिया गया। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।
लगातार सामने आ रहे कुपोषण के मामलों ने महिला एवं बाल विकास विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आदिवासी अंचलों में योजनाओं के क्रियान्वयन और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई साफ नजर आ रही है।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे क्षेत्र में कुपोषित बच्चों का तत्काल सर्वे कराया जाए, दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई हो तथा सभी पात्र बच्चों को पोषण योजनाओं का लाभ तुरंत दिलाया जाए, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान खतरे में न पड़े.








Be First to Comment