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बाल विवाह रोकथाम हेतु देवउठनी एकादशी पर जिले में विशेष निगरानी के निर्देश / Shivpuri News

शिवपुरी: देवउठनी एकादशी (01-02 नवम्बर 2025) के शुभ अवसर पर जिले में बड़ी संख्या में विवाह आयोजन होने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी रवीन्‍द्र कुमार चाैधरी द्वारा जिले में बाल विवाह की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। शासन की मंशा के अनुरूप शिवपुरी जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के उद्देश्य से व्यापक कार्ययोजना पर कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।
जिले के सभी तहसील एवं विकासखण्ड स्तर पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विवाह आयोजनों पर निकटतम दृष्टि रखें। आवश्यक निर्देशों के तहत प्रत्येक ग्राम अथवा वार्ड में बाल विवाह की सूचना प्राप्त करने हेतु सूचना तंत्र का गठन किया जायें। सूचना तंत्र में शिक्षक, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, स्व सहायता समूह की सदस्य, शौर्यादल, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मातृ सहयोगिनी समिति, सरपंच / पंच / पार्षद, ग्राम पंचायत सचिव एवं ग्राम वार्ड के सक्रिय सदस्य हो सकते है। बाल विवाह रोकथाम में सहयोग देने वाले सूचना तंत्रों / सूचनादाताओं की पहचान गोपनीय रखी जाए। यह सूचना तंत्र ग्राम /वार्ड में हो रहे प्रत्येक विवाह आयोजन की जानकारी रखेंगे तथा बाल विवाह होने की स्थिति में परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास अथवा कन्ट्रोल रूम नम्बर 07492356963 अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन नम्बर 1098, महिला हेल्पलाइन नम्बर 181 या पुलिस को 112 नंबर पर सूचित कर सकते है।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी अंतर्विभागीय समन्वय से परियोजना स्तर पर एक उडनदस्ता गठित करें। उडनदस्ता अपने क्षेत्र में हो रहे विवाह आयोजन / सामूहिक विवाह स्थलो का भ्रमण करेगें तथा यह सुनिश्चित करें कोई बाल विवाह सम्पन्न नही हो रहा है।
भ्रमण के दौरान बाल विवाह की सूचना अथवा बाल विवाह होता पाये जाने पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही करेगें।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 का स्कूल / कॉलेज एवं अन्य माध्यमों से समुचित प्रचार-प्रसार कराया जाना सुनिश्चित करें।
जिला स्तर एवं विकासखण्ड स्तरो पर विवाह आयोजनों में सेवाएं देने वाले सेवा प्रदातओं जैसे- प्रिंटिग प्रेस, हलवाई, कैटरर्स, धर्मगुरु, बैंड वाला, ट्रान्सपोर्ट वाले, समाज के मुखिया एवं जनप्रतिनिधि तथा अशासकीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों को बाल विवाह दुष्परिणामों से परिचित कराया जाए। सेवा प्रदाताओं से विवाह आयोजन में सेवाएं देने से पूर्व वर-वधु की उम्र के प्रमाण लेने की अपील की जाए।

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