शिवपुरी: करैरा क्षेत्र में पिछले दो से तीन दिनों से लगातार हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है खेतों में पककर तैयार खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं कई जगहों पर खेतों में पानी भर जाने से धान, मूंगफली और अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है और अब उनकी उम्मीदें केवल मुआवजे पर टिकी हैं.
ग्राम पंचायत दिहायल नैनागिर करई आसपास के गांवों के किसानों ने बताया कि पहले मूंगफली की फसल चौपट हुई, अब धान की फसल भी पूरी तरह नष्ट हो गई है किसानों का कहना है कि उनके पास अब खाने के लिए भी अनाज नहीं बचा है खेती के लिए जो पैसा उन्होंने साहूकारों और बैंकों से कर्ज लेकर लगाया था, अब वह भी नहीं चुका पा रहे हैं ट्रैक्टर और केसीसी की किस्तें बाकी हैं, ऊपर से बच्चों की शादी जैसी जिम्मेदारियाँ भी सिर पर हैं.
किसान राजेंद्र रावत ने बताया, धान की करीब 80 प्रतिशत फसल पूरी तरह खत्म हो गई है पहले मूंगफली गई, अब धान भी चली गई हमारे पास अगली फसल की लागत लगाने तक के पैसे नहीं हैं वहीं ग्राम पंचायत दिहायल के पूर्व सरपंच अशोक रावत ने बताया कि उनकी 60 बीघा जमीन में खड़ी धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उन्होंने कहा, “खेतों में इतना पानी भर गया है कि अब कुछ भी बचाना संभव नहीं है.
उधर, कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने सभी एसडीएम और तहसीलदारों को प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का तत्काल सर्वे कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आदेश के बाद करैरा तहसीलदार कल्पना शर्मा और नरवर तहसीलदार संतोष धाकड़ ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू करा दिया है.
खेतों में भरे पानी, गिरी हुई फसलें और मायूस चेहरों को देखकर किसानों की पीड़ा और बेबसी साफ झलकती है। किसान अब सरकार से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग कर रहे हैं, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें और अपने परिवार का गुजारा चला सकें.







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