शिवपुरी: नवरात्रि के इस पावन अवसर पर हम आपको लेकर चलेंगे एक ऐसे संदेश की ओर, जो हर बहन के आत्मसम्मान, आत्मबल और सनातनी अस्मिता को जगाने वाला है।”
“माँ दुर्गा, माँ काली और माँ सरस्वती… ये सिर्फ देवियाँ नहीं, बल्कि नारी शक्ति की जीवित प्रतीक हैं। हमारी बहनें उसी आदिशक्ति का स्वरूप हैं। लेकिन आज समय आ गया है कि हर बेटी, हर बहन जागरूक हो और अपनी अस्मिता पर गर्व करे।
अभिराम दास जी की ओर से एक संदेश, एक भाई का रक्त से लिखा पत्र… जिसमें कहा गया है –
“मेरी सनातनी बहनों, तुम आदिशक्ति का मान हो, मां दुर्गा, काली, सरस्वती की पहचान हो जिहादियों के षडयंत्र को पहचानो बहनों, अपने सनातनी होने पर गर्व मानो बहनों, किसी जिहादी के जाल में अपनी चमक मत गवाना, तुम सनातनी शेरनी हो कभी बुर्के को मत अपनाना !
आज ज़रूरत है कि हर बहन अपनी संस्कृति, अपनी जड़ों और अपनी शक्ति को पहचाने। नवरात्रि सिर्फ उपवास और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि नारी सामर्थ्य का महापर्व है।
तो बहनो… याद रखो –
तुम दुर्गा की हिम्मत हो,
काली की क्रोध शक्ति हो,
और सरस्वती की ज्ञान गंगा हो।
सनातनी होने पर गर्व करो और अपने धर्म-संस्कार को अपनी पहचान बनाओ।”
अभिराम दास जी की ओर से नवरात्रि का संदेश यही है – नारी का सम्मान ही समाज की पहचान है। जय माता दी!”








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