शिवपुरी: जिले के खांदी गांव में कुछ दिन पहले कुपोषण से एक मासूम की मौत के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग हरकत में आया है। विभाग की टीम ने पोहरी क्षेत्र के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों से कुपोषित बच्चों की खोजबीन की। इस दौरान 14 कुपोषित बच्चे मिले, जिन्हें पोहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एनआरसी में भर्ती कराया गया है।
बच्चों की भर्ती के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। शासन द्वारा स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग को जन्म से ही बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन लगातार कुपोषित बच्चे मिलना यह दर्शाता है कि जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभाई जा रही।
एनआरसी में भर्ती बच्चों में निखिल 1 वर्ष, देहदे, अनिल 2 वर्ष, दुलारा, विकास 1 वर्ष, मेहलोनी, कार्तिक 4 वर्ष, दुल्हारा, जूली 6 माह, मचा खुर्द, मुस्कान 8 माह, मचा खुर्द, समीर 10 माह, डिगडोली, गोमल 8 माह, बेहटी, स्माइली 14 माह, बेहटी, बलवीर 3 माह, टपरपुरा, बीर 2 वर्ष, टपरपुरा, नीतेश 1 वर्ष, देहदे, मल्होत्रा 9 माह, अर्गरा और कुमारी पूनम 10 माह, अर्गरा शामिल हैं।
हाल ही में पोहरी परियोजना का कार्यभार संभालने वाले प्रभारी परियोजना अधिकारी अमित यादव ने बताया – “मुझे जैसे ही कुपोषित बच्चों की जानकारी मिली, तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी को पोहरी एनआरसी में भर्ती कराया गया है। जल्द ही अन्य गांवों का भी निरीक्षण कर और बच्चों को चिह्नित किया जाएगा।”
बता दें कि आदिवासी बस्तियों में कुपोषण की स्थिति चिंताजनक है। शासन से हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। अगर समय रहते व्यापक निरीक्षण नहीं किया गया, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।









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