शिवपुरी की संजय कॉलोनी में मंगलवार को न्यायालय के आदेश पर एक विधवा महिला ममता विश्वकर्मा का पीएम आवास योजना से बना मकान तोड़ दिया गया। कार्रवाई के दौरान ममता का बेटा सदमे से बेहोश हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
यह मामला तब शुरू हुआ जब पड़ोसी संगीता खटीक ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि ममता का मकान रास्ते और सरकारी जमीन पर बना है। कोर्ट ने संगीता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मकान हटाने का आदेश दिया।
ममता का कहना है कि उनके पति ने यह प्लॉट बैजनाथ प्रसाद पांडेय से 80 हजार रुपए में खरीदी थी। इसी जमीन के नाम पीएम आवास योजना की राशि से मकान बनवाया।
पति की मौत के बाद वह सिलाई का काम करके चार बेटियों और एक बेटे का पालन-पोषण कर रही हैं। उनकी बड़ी बेटी की शादी दो महीने बाद होनी थी। कार्रवाई के दौरान ममता और उनकी बेटियां रो-रोकर बेहाल रहीं।
वहीं पड़ोसी महिला ने आरोप लगाया कि पड़ोसी ममता ने रास्ता छोड़ने के बदले चार लाख रुपए की मांग की थी। बातचीत के बजाय उन्होंने सीधे मकान गिरवाने का रास्ता चुना।
अब सवाल यह है कि अगर जमीन सरकारी थी, तो पीएम आवास योजना की राशि कैसे स्वीकृत हुई और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी।







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