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पीके यूनिवर्सिटी शिवपुरी का बीएससी नर्सिंग घोटाला: बिना INC मान्यता के लूटी लाखों की फीस, छात्रों का भविष्य दांव पर / Shivpuri News

पीके यूनिवर्सिटी प्रबंधन का छात्रों के प्रति रहता है सौतेला व्यवहार

मध्य प्रदेश के शिवपुरी में स्थित पीके यूनिवर्सिटी पर 2023-24 सत्र में बीएससी नर्सिंग कोर्स के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाले का गंभीर आरोप लगा है। सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने यूनिवर्सिटी पर भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) से मान्यता के बिना दाखिले करने और लाखों रुपये की फीस वसूलने का आरोप लगाया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में दलालों के नेटवर्क के जरिए यूनिवर्सिटी ने भ्रामक प्रचार किया, जिसमें दावा किया गया कि कोर्स INC से मान्यता प्राप्त है। इस झांसे में आकर कई छात्रों ने अपने परिवार की मेहनत की कमाई और कर्ज लेकर फीस भरी। लेकिन जब सच्चाई सामने आई कि यूनिवर्सिटी के पास 2023-24 सत्र के लिए INC अप्रूवल नहीं था, तो छात्रों के सपने चकनाचूर हो गए। इस धोखाधड़ी ने  उनके दो साल बर्बाद कर उनके करियर को संकट में डाल दिया समय के साथ पैसा भी बरवाद हुआ । कई छात्रों ने बताया कि उनके माता-पिता ने खेत बेचकर या कर्ज लेकर फीस जमा की थी, लेकिन अब उनके पास न डिग्री है, न ही भविष्य की कोई स्पष्ट दिशा। यह घोटाला शिक्षा के क्षेत्र में विश्वास को तोड़ने वाला है और यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है।

छात्रों का  यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर आरोप , प्रोफेसरों का अमानवीय व्यवहार


छात्रों ने बताया कि जब उन्हें यूनिवर्सिटी की ठगी का पता चला, तो उन्होंने अपनी फीस वापस मांगने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने टालमटोल की नीति अपनाई। कुछ छात्रों को आधे पैसे लौटाए गए, जबकि कई को एक भी पैसा नहीं मिला। यूनिवर्सिटी ने कुछ छात्रों को भिंड के मृत्युंजय नर्सिंग कॉलेज में दाखिला दिलवाया, लेकिन वहां की शैक्षणिक व्यवस्था भी अपर्याप्त थी। छात्रों का आरोप है कि पीके यूनिवर्सिटी में प्रोफेसरों की भारी कमी थी, और उपलब्ध प्रोफेसरों का व्यवहार असहयोगी और गैर-जिम्मेदाराना था। डायरेक्टर जितेंद्र मिश्रा और डीन डॉ. ऐमन फातमा पर भी छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए, जिसमें कहा गया कि प्रशासन ने उनकी शिकायतों को अनसुना किया। छात्रों ने अपनी फीस की रसीदें और दस्तावेज दिखाए, जो साबित करते हैं कि उन्होंने समय पर भुगतान किया था, फिर भी उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई। एक छात्र ने कहा, “हमने अपने भविष्य के लिए इस यूनिवर्सिटी पर भरोसा किया, लेकिन उन्होंने हमें धोखा दिया। हमारे दो साल और करियर अंधेरे में डूब गए।” इस घटना ने छात्रों को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया है, और वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

छात्रों ने की कानूनी कार्रवाई की मांग: “हमारा भविष्य बर्बाद कर दिया”

छात्रों और अभिभावकों ने इस घोटाले की उच्चस्तरीय जांच और यूनिवर्सिटी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि दलालों और यूनिवर्सिटी प्रशासन की मिलीभगत से यह संगठित ठगी हुई, जिसके लिए दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। कई छात्रों ने स्थानीय पुलिस, शिक्षा विभाग और अन्य अधिकारियों में शिकायत दर्ज करने की योजना बनाई है। एक प्रभावित छात्र ने कहा, “हमने अपने परिवार की जमा-पूंजी इस यूनिवर्सिटी में लगाई, लेकिन हमें धोखा मिला। हमारी पूरी फीस वापस हो और इस घोटाले की जांच हो।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह शिक्षा के नाम पर ठगी का गंभीर मामला है, जो निजी शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। सवाल यह है कि बिना INC अप्रूवल के यूनिवर्सिटी ने दाखिले क्यों लिए? यूनिवर्सिटी प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। छात्र अब कानूनी लड़ाई और सोशल मीडिया के जरिए अपनी आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि अन्य लोग ऐसी यूनिवर्सिटियों से सावधान रहें।

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