शिवपुरी: जिले के सिकंदरा परिवहन चेकपॉइंट पर अवैध वसूली और मनमानी का खेल अपने चरम पर है। चेकपॉइंट प्रभारी अशोक शर्मा की करतूतों ने इस स्थान को ट्रक चालकों के लिए नर्क बना दिया है। हाल ही में आज एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें एक ट्रक चालक योगेंद्र ने मौके पर मौजूद होकर बताया कि वह पुणे से बनारस जा रहा था, जब चेकपॉइंट प्रभारी अशोक शर्मा ने उसकी फाइल चेक करने के नाम पर रोक लिया और फिर उसकी फाइल लेकर बोलेरो गाड़ी में भाग गए। चालक को तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा, जिसके बाद अशोक शर्मा लौटे। इस घटना ने चेकपॉइंट पर व्याप्त अराजकता और लूटतंत्र को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यह चेकपॉइंट अब नियमों को लागू करने का केंद्र नहीं, बल्कि लूट और गुंडागर्दी का अड्डा बन चुका है। सिकंदरा चेकपॉइंट पर ट्रक चालकों से अवैध वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा है। अशोक शर्मा और उनके द्वारा पाले गए दो दर्जन से अधिक निजी गुर्गे बिना किसी वैध रसीद या दस्तावेज के ट्रक चालकों से 500 से 2,000 रुपये तक की उगाही कर रहे हैं। यह वसूली इतनी बेशर्मी से की जा रही है कि हाइवे पर 2 किलोमीटर तक लंबा जाम लगना अब रोजमर्रा की बात हो गई है। इस जाम ने न केवल चालकों, बल्कि यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए भी भारी परेशानी खड़ी कर दी है। हाइवे पर अफरा-तफरी का माहौल रहता है, और चालकों को अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा इन गुर्गों की जेब में देना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने भ्रष्टाचार और अवैध वसूली को रोकने के लिए पहले परिवहन चेकपॉइंट्स को बंद करने का ऐलान किया था। इस फैसले ने ट्रक चालकों में राहत की उम्मीद जगाई थी, क्योंकि चेकपॉइंट्स पर होने वाली उगाही से वे पहले ही त्रस्त थे। लेकिन सिकंदरा चेकपॉइंट पर अशोक शर्मा की मनमानी ने सरकार के इस आदेश को पूरी तरह से बेकार कर दिया है। चालक योगेंद्र ने बताया कि फाइल चेक करने के नाम पर उसे रोका गया, और फिर उसकी फाइल लेकर अशोक शर्मा बोलेरो गाड़ी में भाग गए। तीन घंटे के इंतजार के बाद जब वह लौटे, तो चालक को बिना किसी स्पष्ट कारण के परेशान किया गया। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि चेकपॉइंट पर नियमों का पालन नहीं, बल्कि चालकों को डराने-धमकाने और लूटने का काम हो रहा है।
स्थानीय लोगों और ट्रक चालकों का कहना है कि अशोक शर्मा के गुर्गे बेखौफ होकर हाइवे पर आतंक मचा रहे हैं। विरोध करने वाले चालकों को मारपीट की धमकी दी जाती है, और कई बार उनके साथ बदसलूकी भी की जाती है। सिकंदरा चेकपॉइंट पर यह लूटतंत्र न केवल परिवहन व्यवसाय को ठप कर रहा है, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार की साख को भी मिट्टी में मिला रहा है। चालकों का कहना है कि सरकार के चेकपॉइंट बंद करने के फैसले के बाद भी सिकंदरा में यह उगाही जारी रहना जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की नाकामी को उजागर करता है। कई चालकों ने बताया कि इस अवैध वसूली के कारण वे अपनी आजीविका चलाने में असमर्थ हो रहे हैं। उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा इन गुर्गों की जेब में जा रहा है, जिससे उनके परिवारों का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
यह बेहद शर्मनाक है कि एक सरकारी चेकपॉइंट लुटेरों का गढ़ बन चुका है। अशोक शर्मा की इस मनमानी ने परिवहन विभाग की विश्वसनीयता को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। चालकों और स्थानीय लोगों में इस लूटतंत्र के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। वे इस अत्याचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। चालकों का कहना है कि सिकंदरा चेकपॉइंट पर हो रही यह लूट परिवहन उद्योग के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। यह स्थिति न केवल चालकों, बल्कि पूरे परिवहन व्यवसाय को प्रभावित कर रही है, क्योंकि इस तरह की उगाही के कारण माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
मध्य प्रदेश सरकार को इस लूट के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है। अशोक शर्मा और उनके गुर्गों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए बिना इस लूटतंत्र को रोकना असंभव है। सरकार को इस मामले की गहन जाँच करानी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा देनी चाहिए। साथ ही, इस तरह की अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए चेकपॉइंट्स पर सख्त निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। चालकों ने यह भी माँग की है कि सिकंदरा चेकपॉइंट पर तैनात प्रभारी को तत्काल हटाया जाए और उनकी जगह ईमानदार और जिम्मेदार अधिकारी की नियुक्ति की जाए।
सिकंदरा चेकपॉइंट पर व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी न केवल शिवपुरी जिले, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की छवि को धूमिल कर रही है। सरकार की चुप्पी इस मामले को और गंभीर बना रही है। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक ट्रक चालक इस लूट को सहन करते रहेंगे? जिला प्रशासन और परिवहन विभाग को इस उगाही के खिलाफ तुरंत कदम उठाने चाहिए। अशोक शर्मा और उनके गुर्गों को सजा देकर चालकों को राहत दी जानी चाहिए। इसके साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए जाने चाहिए। यदि इस भ्रष्टाचार को जल्द नहीं रोका गया, तो यह न केवल परिवहन उद्योग, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सरकार की साख के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।







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