शिवपुरी: जिले के पोहरी में सरपंच द्वारा अपने बेटे को ही नौकरी पर रखने और लाखों रुपए के गबन का मामला सामने आया है। दरअसल कृष्णगंज पंचायत की महिला सरपंच रामकली ने पंचायत सचिव नंदकिशोर गुप्ता के साथ मिलकर अपने बेटे को ही पंचायत में नौकरी पर रखा और पंचायत के बैंक खाते से लाखों रुपए वेतन के नाम पर निकाल लिए। मामले का खुलासा हाईकोर्ट पहुंचने पर हुआ।
पहले समझे मामला
31 जुलाई 2018 को सात ग्राम पंचायतों को मिलाकर पोहरी नगर परिषद का गठन किया गया था। इसकी विभागीय प्रक्रिया 2015 से ही शुरू हो गयी थी। नगर परिषद बनने के बाद भी सरपंच के कार्यकाल समाप्त होने तक पंचायतों के बैंक खातों अधिकार सरपंच एवं पंचायत सेक्रेटरी के पास ही रहे।
इसी दौरान कृष्णगंज पंचायत की महिला सरपंच रामकली ने 1 अप्रैल 2015 को पंचायत में अपने बेटे चतुर सिंह सिठेले को पंप अटेंडर की नौकरी पर रख अपने ही कार्यकाल में वेतन के नाम पर लाखों रुपए निकाले। जबकि इसी पद पर पहले ही एक अन्य व्यक्ति की नियुक्ति 5 हजार रुपए प्रतिमाह के वेतन पर हो रखी थी।
पांच सालों में निकाले लाखों रुपए
पोहरी नगर परिषद घोषित होने के बाद 28 नवंबर 2020 को कृष्णगंज सहित सभी सात पंचायतों के बैंक खातों बंद कर दिया गया था। लेकिन इससे पहले ही कृष्णगंज सरपंच ने सचिव के साथ मिलकर पंचायत के वाउचर बना लाखों रुपए का भुगतान करा लिया था।
पंचायत के खातों से सरपंच ने पहले वाउचर के जरिए 2017 तक के वेतन के नाम पर 1 लाख 30 हजार रुपए, इसके बाद दूसरे वाउचर में 2018 के वेतन के लिए 95 हजार रुपए की राशि निकाली। इसके बाद खाता बंद होने से पहले सरपंच ने एक और वाउचर के जरिए 60 हजार रुपए निकाले। इन सभी वाउचर पर तत्कालीन पंचायत सचिव के भी हस्ताक्षर हैं।
नगर परिषद में भी यही करने की कोशिश, हाईकोर्ट में हुआ खुलासा
कृष्णगंज पंचायत का विलय नगर परिषद में हो जाने के बाद सरपंच रामकली ने पंचायत से फिर एक प्रस्ताव बनाकर नगर परिषद में भेजा। इसमें भी अपने बेटे चतुर सिंह सिठेले को नौकरी देने की मांग की थी। लेकिन ये प्रस्ताव खारिज हो गया। इसके बाद चतुर सिंह सिठेले ने नौकरी पर दावा ठोकते हुए हाई कोर्ट में अपील की। जब कोर्ट ने इस विषय पर पोहरी एसडीएम और नगर परिषद से सवाल जबाब किए तब इस मामले का खुलासा हुआ।
नगर परिषद ने कोर्ट को अपने जवाब में बताया कि सरपंच पुत्र चतुर सिंह सिठेले ने पहले नियम विरुद्ध पंचायत में नौकरी की और अब नगर परिषद में भी इसी प्रकार नौकरी लेना चाहता है। मामला उलटा पड़ता देख 21 जून 2024 कोर्ट से अपना केस वापस ले लिया, और कोर्ट को कहा कि उसकी नौकरी अब ग्वालियर में लग गई है इसलिए उसे नगर परिषद में नौकरी की जरूरत नहीं है।
जांच के बाद करेंगे कार्रवाई
इस मामले में हमने पोहरी नगर परिषद के सीईओ गिर्राज शर्मा से बात की। उनका कहना है कि पंचायत में कोई जनप्रतिनिधि अपने सगे परिजन को नौकरी नहीं दे सकता है। इस मामले में जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

महिला सरपंच ने अपने ही बेटे को दी नौकरी, लाखों की सैलरी निकाली, CEO बोलें कार्रवाई करेंगे / Shivpuri News
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