शिवपुरी। अपना व अपने परिवार के दर्द को देखकर तो सभी दुखी होते हैं और उस दर्द को दूर करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं, लेकिन जो कोई दूसरे के दर्द को अपना समझे और उसके दर्द को दूर करे तो उससे बड़ा धर्म का काम कोई और नहीं होता है। ऐसा ही
बीते रोज हुआ शाम के समय शिवा अपने पापा के साथ चौराहे पर जूस पीने गया था तभी एक गरीब औरत को देख कर रोने लगा। जब उसके पापा ने पूछा कि क्यों रो रहे हो बेटा तो रोते रोते कहने लगा कि पापा कितनी ठंड है इन बेचारों को सर्दी लग रही होगी और इनके पास कोई कपड़े भी नही है बेचारे बीमार हो जायेंगे तो इनका क्या होगा,अपने पास कुछ हो तो इन्हें ओढ़ने दे दो फिर क्या था रात भर जरूरतमंद लोगों को ढूंढा गया और उन्हें इस कपकपाती सर्दी में थोड़ी सी राहत के लिये 25 लोगों को कम्बल वितरित किये गये ,अब शिवा बहुत खुश है मानो उसका कोई मनपसन्द खिलौना उसे मिल गया हो।
ऐसी भावना बच्चों के मन में अभी से होना चाइये की लोगों के दर्द को अपना दर्द समझ सकें।






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