
वॉशिंगटन। भारत और रूस के बीच जिस एस-400 एयर डिफेंस डील की बात चल रही है उसे लेकर अमेरिका शुरू से ही आपत्ति जताता आया है। यहां तक की उसने बीच में तो इसी तरह की एक डील भी ऑफर की थी। अब एक बार फिर से अमेरिका ने कहा है कि वो भारत की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है लेकिन रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम सौदे को लेकर उसे आपत्ति है। अमेरिका इस सौदे को भारत के साथ अपने रक्षा सहयोग में सीमा के तौर पर देख रहा है।
ट्रंप प्रशासन की ओर से यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारी के उस वक्तव्य के हफ्ते भर बाद आया है जिसमें कहा गया था- एस-400 सौदा भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग पर गंभीर असर डाल सकता है। एस-400 रूस का अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है जिसमें दुश्मन की मिसाइल या विमान को 400 किलोमीटर दूरी पर ही नष्ट किया जा सकता है। चीन इस सिस्टम की खरीद के लिए 2014 में ही सौदा कर चुका है जबकि भारत ने पांच अरब डॉलर का सौदा 2018 में किया है
अमेरिकी विदेश विभाग की वरिष्ठ अधिकारी एलिस जी. वेल्स ने एशिया मामलों की उप संसदीय समिति को बताया कि हाल के वर्षों में अमेरिका ने भारत के साथ अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा सैन्य अभ्यास किए हैं। ट्रंप प्रशासन भारत की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है। हम भारत के साथ अलग तरह का रक्षा सहयोग करने को तैयार हैं जिसमें उसे बड़े रक्षा सहयोगी के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। भारत को यह दर्जा अमेरिकी संसद ने दिया है।
एलिस ने एस-400 की खरीद से अमेरिका के साथ भारत के संबंध पर पड़ने वाले असर के बारे में भी उप समिति को विस्तार से बताया।अधिकारी ने बताया कि कुछ हफ्ते पहले ही भारत ने अमेरिका, जापान और फिलीपींस के साथ दक्षिण चीन सागर में अपने युद्धपोत भेजे थे। हम कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय और चतुष्पक्षीय सैन्य सहयोग कर रहे हैं। दस साल पहले अमेरिका जिन हथियारों को देने के बारे में भारत से बात नहीं करता था, उन्हें देने के बारे में आज कर रहा है। अमेरिका भारत के साथ रक्षा सहयोग को विस्तार देना चाहता है। लेकिन एस-400 सिस्टम की खरीद को लेकर हमें गंभीर आपत्ति है।





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