अयोध्या लेखक-योगेश धाकड़

अयोध्या में 70 एकड़ में बन रहे राम मंदिर परिसर में 13 और मंदिर बनाए जाएंगे। इनमें भगवान सूर्य, भगवान शिव, माता भगवती, गणपति, हनुमान जी के अलावा अन्नपूर्णा देवी के मंदिर होंगे। इन मंदिरों का निर्माण परकोटे का काम पूरा होने के बाद शुरू होगा। परकोटे के बाहर 7 अन्य मंदिर बनने हैं। इसमें ऋषि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, शबरी, निषाद राज और अहिल्या का मंदिर होगा। इन मंदिरों का निर्माण 2024 तक पूरा हो जाएगा।
इधर, प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए मुख्य यज्ञ मंडप बन कर तैयार हो गया है। मंदिर के महासिंहद्वार से पूरब दिशा में यज्ञमंडप बनाया गया है। श्रीराम जन्मभूमि के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया, “राम मंदिर परिसर में बन रहे भगवान राम के भव्य मंदिर के अलावा दूसरे चरण में 13 मंदिरों का निर्माण किया जाएगा। परकोटे के चारों ओर पंचायतन को परिभाषित करते हुए 6 अन्य भगवानों के मंदिर बनाए जाएंगे। इनका निर्माण अगले चरण में होगा।”
मंदिर को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि जो भी श्रद्धालु आएं, वो कम से कम 1 घंटे तक परिसर में रुकें। दूसरे फेज में जो भी मूर्ति लगेंगी, उसको परिसर में ही बनाया जाएगा। ट्रस्ट के सूत्रों के मुताबिक, प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद मंदिर में दूसरे फेज का निर्माण शुरू हो जाएगा।
पूर्व दिशा में होगा मंदिर का प्रवेश द्वार

यह मंदिर का मुख्य दरवाजा है। यहीं से श्रद्धालु सीढ़ियां चढ़कर रामलला के दर्शन करने के लिए जाएंगे।
मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार पूर्व दिशा में होगा। उत्तर दिशा में निकास द्वार है। 70 एकड़ के 30% भाग पर मंदिर का निर्माण हो रहा है। बाकी जमीन पर ग्रीनरी यानी पौधे लगाए जाएंगे। यहां पहले से मौजूद 600 से अधिक पेड़ों को भी कटने से बचाया गया है। सीता कूप के पास परकोटे में आने वाले वटवृक्ष को दूसरी जगह पर शिफ्ट कर दिया गया है।

राम मंदिर के अंदर बने स्तंभों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई हैं।
17 जनवरी को रामलला की नई मूर्ति आएगी सामने
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होनी है। 16 जनवरी से प्राण प्रतिष्ठा के लिए जरूरी अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे। ट्रस्ट से जुड़े सूत्र बताते हैं कि गर्भगृह में विराजित की जाने वाली रामलला की नई मूर्ति 17 जनवरी को सार्वजनिक की जाएगी। इसी दिन रामलला की नई प्रतिमा यानी चयनित अचल मूर्ति को शोभायात्रा के जरिए नगर भ्रमण कराया जाएगा।
इधर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने दावा किया है कि कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज की बनाई रामलला की मूर्ति मंदिर में स्थापित होगी। उन्होंने लिखा, ‘जहां राम हैं, वहां हनुमान हैं। कर्नाटक हनुमान की भूमि है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि हनुमान की भूमि कर्नाटक से रामलला के लिए यह एक महत्वपूर्ण सेवा है।’ उधर, भाजपा नेता येदियुरप्पा ने भी योगीराज को बधाई दी और इसे राज्य के लिए गौरव का पल बताया। हालांकि, राम मंदिर ट्र्स्ट ने इसकी अब तक कोई पुष्टि नहीं की है।
परकोटे के अंदर होंगे 6 मंदिर

18 को मंडप प्रवेश पूजन, वास्तु पूजन, गणपति पूजन के साथ जलाधिवास होगा। अगले दिन से अनुष्ठान के लिए अग्नि प्रज्ज्वलित की जाएगी। 20 जनवरी को देशभर की पवित्र नदियों के जल से शुद्धिकरण के बाद अन्नाधिवास होगा। 21 को शैयाधिवास होगा। 22 को PM मोदी मुख्य यजमान के तौर पर दोपहर 12:20 के बाद मृगशिरा नक्षत्र में रामलला के नवीन विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा कर पहली आरती उतारेंगे।

परिसर के अंदर बन रहे परकोटा में 6 मंदिर समेत 13 मंदिर का निर्माण होगा।
मंदिर परिसर में रामायणकालीन औषधि वाले पौधे लगाए जा रहे
राम मंदिर परिसर में रामायण काल के ऋषियों के मंदिर जिस जगह पर बनने हैं वहां काफी संख्या में पेड़ लगे हैं। यहां दिन में भी सूरज की रोशनी जमीन पर नहीं आती है। इसके अलावा, परिसर में अलग-अलग उपवन विकसित किए जा रहे हैं। इसमें नक्षत्र वाटिका भी शामिल होगी। रामायणकालीन औषधि वाले पौधे भी परिसर में लगाए जा रहे हैं।
32 सीढियां चढ़कर होंगे रामलला के दर्शन
राम मंदिर के नए गर्भगृह तक जाने के लिए सिंह द्वार से 32 सीढियां चढ़कर सबसे पहले रंग मंडप में जाएंगे। यहां भगवान राम के जीवन से जुड़े चित्र और किरदार दीवारों पर उकेरे गए हैं। रंग मंडप से आगे चलने पर नृत्य मंडप होगा। गर्भगृह के सबसे नजदीक यही जगह है।

राम मंदिर के लिए तराशे गए पत्थरों की क्रेन से ढुलाई करके निर्माण स्थल पर ले जाया जा रहा है।
नृत्य मंडप में देवी देवताओं की मूर्तियां, रामायण की चौपाइयां पत्थरों पर बहुत सुंदरता से उकेरी गई हैं। नृत्य मंडप से आगे बढ़ने पर भगवान का गर्भ गृह पड़ेगा। 3 मंजिल के राम मंदिर में अब सेकेंड फ्लोर बनाया जा रहा है। मंदिर का ग्राउंड फ्लोर यानी गर्भग्रह तैयार हो चुका है। पहली मंजिल भी 80% बन चुकी है।
तमिलनाडु और केरल शैली के परकोटे बनाए जा रहे
मंदिर में परकोटों का निर्माण तेजी से करवाया जा रहा है। ऐसे परकोटे सिर्फ तमिलनाडु और केरल के मंदिरों में बनते हैं। यह नए तरह का प्रयोग है। अभी निर्माण जारी है, पूरा होने में करीब 6 महीने और लगेंगे। इन परकोटा में बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए लिफ्ट लगेगी।

कनक भवन मंदिर में विराजमान भगवान राम और सीता के विग्रह श्वेत संगमरमर के बनाए गए हैं।
रामलला के हाथ में होगा धनुष-बाण
गर्भगृह में विराजने वाली रामलला की जिस प्रतिमा का चयन किया गया है। वह 51 इंच लंबी और 5 साल के बाल स्वरूप की प्रतिमा है। रामलला को खड़े हुए धनुष-बाण लिए दिखाया गया है। चंपत राय के मुताबिक, प्रतिमा ऐसी है जो राजा के पुत्र की तरह और विष्णु का अवतार लगे। गर्भगृह में रामलला कमल के फूल पर विराजमान होंगे। कमल के फूल के साथ उनकी लंबाई करीब 8 फीट होगी।
गर्भग्रह में रखे जाने के लिए रामलला की 3 प्रतिमाएं बनाई गई हैं।

यह अयोध्या के राम मंदिर का गर्भ गृह है। इसी में 22 जनवरी को रामलला विराजेंगे।
31 साल बाद बदलेंगे रामलला के दर्शन के नियम, नंगे पैर कर सकेंगे दर्शन
प्राण प्रतिष्ठा के अगले दिन (23 जनवरी) से रामलला के दर्शन का 31 साल पुराना यानी 1992 के बाद से चला आ रहा नियम भी बदल जाएगा। भक्त अपने आराध्य के दर्शन के लिए नंगे पांव जा सकेंगे। दरअसल, 6 दिसंबर 1992 को जब रामलला टेंट में विराजमान हुए थे, तब से भक्त जूते-चप्पल पहनकर रामलला के दूर से दर्शन करते थे। भक्त एक गेट से अंदर आते थे और चलते हुए दूसरे गेट से निकल जाते थे। यह निर्णय सुरक्षा कारणों से लिया गया था। यही नहीं, तब मंदिर में जूते-चप्पल रखवाने के अलग इंतजाम भी नहीं थे।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया, “मंदिर परिसर में पब्लिक फैसिलिटी सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। यह अंतिम दौर में है। यहां दर्शनार्थियों के सामान की जांच के साथ उसे रखने का प्रबंध किया गया है। यहां जूते-चप्पल रखने के भी इंतजाम हैं। इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को प्रभार सौंपा जाएगा।

भक्तों को स्क्रीनिंग एक्स-रे मशीन से होकर गुजरना होगा
मंदिर की चार स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी हो गई है। श्रीरामजन्मभूमि पथ पर सिविल पुलिस चार जगहों पर चेकिंग करेगी। इसके बाद CRPF और कमांडों हर व्यक्ति पर सतर्क नजर रखेंगे। गर्भगृह के आस-पास SSF के जवान और खुफिया अफसर नजर रखेंगे।
मंदिर में प्रवेश से भक्तों को इन पॉइंट पर डोर फ्रेम मेट डिडेक्टर और हैंड फ्रेम मेटल डिडेक्टर सहित स्क्रीनिंग एक्स-रे मशीन से होकर गुजरना होगा। इस दौरान आप एक सुई भी लेकर प्रवेश करेंगे, तो वह सुरक्षाकर्मियों की निगाह में होगा और उसे दर्शन से पहले सुरक्षित रखवा लिया जाएगा।
राम लला का मंदिर

मंदिर के कॉरीडोर की खासियत







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