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स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से झोलाझाप डॉक्टरों का अड्डा बना पोहरी और बैराड़ ,कोरोना वायरस के चलते भी चल रहा है जान से खिलवाड़ | Pohari News

सुनील रजक 7000757275 पोहरी। आदिवासी बाहुल्य से सटे पोहरी और बैराड़ मे  झोलाझाप डॉक्टरों का जमावड़ा लगा हुआ है यह डॉक्टर कोरोना वायरस के चलते लोगो की जान से खिलवाड़ करने पर तुले हुए है बिना किसी जानकारी के मरीज का इलाज किया जा रहा है चाहे मरीज बच्चा हो या कोई बुजर्ग यह उसका इलाज करने से परहेज नही करते है जबकि इनके पास इलाज करने के लिए कोई वैध प्रैक्टिस या किसी प्रकार की डिग्री नही होती है अपने फायदे के लिए निरंतर यह डॉक्टर मरीज की जान से खिलवाड़ करने में लगे हुए है जबकि इस वक़्त भयंकर कोरोना महामारी से जूझ रहे है वही यह झोलाझाप डॉक्टर अपने अपने क्लीनिक में शोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करते हुए भीड़ लगा कर इलाज कर रहे है चाहे बुखार किसी भी स्तर का हो यह बिना जाने कोई भी दवा उसे लिख कर दे देते है 
स्थानीय अस्पतालों में डाक्टरों की कमी के कारण लोगों को मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिकों में दवा करानी पड़ रही है। झोलाछाप डॉक्टर गरीबो से मनमानी रुपए लेने के साथ ही उनकी जान से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता है।
गौरतलब है कि पोहरी और बैराड़ क्षेत्र में करीब एक दर्जन झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक बगैर किसी रोकटोक के चल रहे हैं। ये पोहरी क्षेत्र में होने के साथ ग्रामीण अंचलों में जैसे चर्च एवम झिरी  भी फैले हैं। किसी को बुखार चढ़ा है तो कोई शर्दी-खांसी से परेशान है। उल्टी-दस्त के मरीज भी बड़ी संख्या में झोलाछाप डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। जहां मात्र एक बाटल चढ़ाने के ही 100 रुपए से अधिक ले लिए जाते हंै। ये डॉक्टर अपने क्लीनिकों में दवाएं भी रखते हैं और मरीजों को भर्ती भी कर लेते हैं। जबकि ऐसा करने के लिए इनके पास वैध डिग्री तक नहीं होती।
बिना डिग्री के ये डॉक्टर विभिन्न गंभीर बीमारियों का इलाज तक कर रहे हैं मरीजों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। खास बात यह है कि गोरखधंधा प्रशासन की नाक के नीचे खुले आम हो रहा है लेकिन कोई भी अधिकारी इन पर उचित कार्रवाई नहीं कर रहा
झोलाछाप डॉक्टरों के पास ये डिग्रियां होती हैं : आरएमपी, एमबीबीएस, एमडीबी एएमएस (अल्टरनेटिव), बीवाईपीएस (बायोकेमिकल), वीईएचएमएस (इलेक्ट्रो होम्योपैथी)। ये सारी डिग्रियां फर्जी की श्रेणी में आती है।
न डिग्री न अनुभव, अस्पतालों में डॉक्टरों कमी खामी से पनप रहे ऐसे क्लीनिक
झोलाछाप डॉक्टरों से कब मुक्त होंगे ग्रामीण?
झोलाझाप डॉक्टरों को प्रशासन का तनिक मात्र भी डर नही है ये खुलेआम प्रशासन की नाक के नीचे अपना गोरख धंधा चला रहे है कभी किसी तरह की कार्यवाही हो भी जाये तो वो भी नाम मात्र दिखावा ही होता है जिससे इन झोलाझाप को कोई फर्क नही पड़ता है 
आरएमपी यानि रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की डिग्री लिए ये झोलाछाप डॉक्टर धड़ल्ले से एलोपैथी दवा और इंजेक्शन का उपयोग कर आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर हैं और लोग सस्ते इलाज के झांसे में आ कर अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं. जिससे लोगो शारीरिक और आर्थिक रूप से बर्बाद हो रहे है
झोलाछाप डॉक्टर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ तो करते ही हैं, साथ ही ठगी करने से भी बाज नहीं आते हैं. लोगों को गंभीर बीमारी का डर दिखाकर उनसे तब तक रुपए ऐंठते रहते हैं जब तक कि वो आर्थिक रूप से कमजोर नहीं हो जाते हैं। 
झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से कई लोगों की मौत के मामले भी सामने आ चुके हैं। 
झोलाझाप डॉक्टरों आमजनों की जान के खिलवाड़ करने के साथ साथ क्षेत्र के वातावरण को भी नुकसान पहुचाने का काम कर रहे है इनके द्वारा किसी भी स्थान पर वेस्ट मटेरियल फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है जिससे वातावरण को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है प्रकति के साथ सबसे ज्यादा खिलवाड़ इनके द्वारा ही किया जा रहा है यह अपने क्लीनिक से इस्तेमाल किये सिरिंज एवम ड्रेसिंग को जगह जगह फेक दिया जाता है जिससे वह वेस्ट मटेरियल (गंदगी) नालियों द्वारा आमजन एवम वातावरण को काफी नुकसान प्रदाय कर रही होती है
सुबह से खुल जाते है क्लिनिक
झोलाझाप डॉक्टरों के क्लिनिक सुबह से ही प्रशासन के आंखों के सामने खुल जाते है एवम कुछ क्लीनिक चोरी छुपे देर रात तक खुले रहते है वही कुछ एक क्लिनिक दोपहर तक बंद कर अपने घरों से मरीजो का इलाज करते है यहाँ तक कि अपने घरों में इन्होंने भर्ती अस्पताल तक खोल रखा है।  
और प्रशासन के आंखों के सामने रहते यह लोगो की जिंदगियों से खिलवाड़ करते नजर आ रहे है 
स्वास्थ विभाग क्यों नही करता कार्यवाही 
सूत्रों से जानकारी है कि इन झोलाझाप डॉक्टरों की पहुँच ऊपर तक रखते है और कुछ सांठगांठ की दम पर खुलेआम फर्जी क्लिनिक संचालित करते है जिनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही नही होती है
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