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दूसरों के खेतों से रास्ता था जिन्होंने बंद कर दिया तो मुसीबत होने लगी यहाँ वहाँ से भटक कर निकलना पड़ता है / Pichore News

पिछोर। जिला के पिछोर अनुविभागीय क्षेत्र की ग्राम पंचायत धौर्रा से करीब 3 किलोमीटर दूरी पर स्थित आदिवासी मजरा बरबटपुरा एक ऐसा मजरा है जहाँ पीढ़ियों से कोई सरकारी रास्ता निर्मित नही हुआ है जबकि यहाँ लगभग 60 से 70 आदिवासी परिवार निवासरत है जो वर्षो से दूसरों के खेतों की मेड से आने जाने के लिए अपना टेम्प्रेरी रास्ता बनाये हुए थे यह अब उन्होंने बंद कर दिया जिससे अब नई समस्या पैदा हो गई मजरा के सभी लोग  अब मुख्य सड़क व अपनी पंचायत में राशन व बीमारी हेतु निकलने के लिए तक परेशान होते है जो हर समय पत्थरों के बीच से पैदल गुजरते नजर आते है एक ही पत्थरों बाली रास्ता है जहाँ से रोजाना बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक वही से निकल रहे है इस कारण आये दिन उन्हें परेशानी का सबब बना हुआ है   पिछले दिनों हालात यह बने की खुद बेबस होकर रास्ता बनाने का द्रण  मजरा की जनता ने लेकर बड़ी मेहनत कर रास्ता बनाना चाहा तो वहाँ बड़े बड़े पत्थर की चट्टानों का जमघट लगा हुआ है इस कारण रास्ता बनाने में वह नाकाम रहे है औऱ काम वही अधूरा छोड़ दिया जिसकी सूचना सचिव को दी तो रोजगार सचिव स्वम मजदूरी के औजार लेकर रास्ता बनाने में मदद के लिए  शामिल हो गए फिर भी वह मेहनत का फल प्राप्त न कर सकें इस कारण हालात अभी वही के वहीं बने हुए है
अगर मजरा गांव की बात की जाए तो वहाँ शासकीय प्राथमिक विद्यालय एवं बिजली ट्रांसफार्मर स्थित तो है परन्तु रास्ता नही है कहाँ से मास्टर पढ़ाने आये और कहा से आदिवासी बच्चों व उसके परिवार जनों को लाभ मिले इतनी जटिल समस्या के अलाबा रास्ता का कोई हल वर्षों से नही निकलता दिख रहा है इस दौरान परेशानी चाहे फिर वह महिला डिलेवरी का मामला हो या आकस्मिक बीमारी का जो समय पर कोई वाहन मौके पर नही पहुच सकता चाहे फिर बडे हादसा का शिकार क्यों न देखना पड़े इस प्रकार की किल्लत से कब तक गांव बालों को छुटकारा मिल पायेगा इसकी सूचना अनुविभागीय तक पहुचा दी गई है  फिर भी आश्वासन शिवा अभी तक कुछ नही मिला 
70 आदिवासी परिवार बाला मजरा गांव जहाँ एक भी नही मिला प्रधानमंत्री आवास 
हैरत की बात है जो पंचायत जनपद की सबसे पहले ओडीएफ घोषित  होने बाली पंचायत है जहाँ के आदिवासी मजरा में आज तक एक भी कुटीर सेंसन नही हुई है क्या बात है जिससे नाराज होकर आदिवासी वर्ग अपने आप बहुत निराशाजनक महसूस कर रहे है  वहाँ की आदिवासी जनता का सीधा आरोप है कि आखिर क्या बात है कि सरकार की योजना आस पास के सभी पंचायत में लाभान्वित हो रहे है परन्तु यहाँ क्यों नही शिकायत करते है तो केबल सरपंच ,सचिव व रोजगार सचिव के बस्ते तक ही सीमित है जो सुनते ही नही है 
शिकायत करी तो कुछ दिनों का दिया था आश्वासन आज आ सकती है राशि 
आदिवासियों का कहना है कि हमारे साग सब्जी बाले रुपये क्यों नही आये जबकि आसपास बाली पंचायतों में सभी के आ गए है 
बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत धौर्रा के दो मजरा बरबटपुरा व चिरवाई ऐसे है जहाँ आदिवासी महिलाओं के खातों में इस बार एक भी रुपया नही आया जबकि हमारा पैसा पिछले माह आया था परंतु इस बार एक क्लिक में क्यों शामिल नही हुआ जबकि हर बार सरकार से  मिलने बाले साग सब्जी के रुपये आते है लेकिन इस बार क्यों नही और देखा जाए तो अन्य पंचायत बाली महिलाओं के खाते में सभी के रुपये आ गए  परन्तु हमारे क्यों नही इसकी जानकारी सरपंच, सचिव को की गई तो वह अपना पल्ला झाड़ने में माहिर बताए गए है 
रोजगार सचिव अजब सिंह लोधी का कहना है कि बरबटपुरा आदिवासी मजरा में रास्ता का स्टीमेट बना कर हमने भेज दिया है जल्द ही काम शुरू हो जायेगा , इनकी सब्जियों की राशि के संबंध में हमने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दे दी हैं
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