जयपुर

राजस्थान में कांग्रेस ने 10 लोकसभा प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। इनमें से 5 प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्होंने कभी सांसद का चुनाव नहीं लड़ा। दो ने विधानसभा का भी चुनाव नहीं लड़ा।
इनमें जोधपुर कांग्रेस में लंबे समय से एक्टिव और रियल स्टेट का बड़ा नाम करण सिंह उचियारड़ा और IAS तारचंद मीणा (जिनका एक दिन पहले ही वीआरएस एप्रूव हुआ था) हैं। हालांकि उनका वीआरएस 20 मार्च से एप्लीकेबल होगा।
बाकी 3 प्रत्याशी अलवर के मुंडावर से पहली बार विधायक बने ललित यादव, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर अलवर के कठूमर से हारी प्रत्याशी संजना जाटव और पूर्व केंद्रीय मंत्री शीशराम ओला के बेटे व झुंझुनूं से लगातार 4 बार विधायक व दो बार मंत्री रहे बृजेन्द्र ओला हैं।
करण सिंह उचियारड़ा को 2 बार के लोकसभा सांसद, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और ललित यादव को 2 बार के राज्यसभा सांसद व केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सामने मौका दिया गया है।
संजना जाटव को साल 2004 में बीजेपी सांसद रह चुके रामस्वरूप कोली के सामने उतारा गया है। वहीं पूर्व IAS ताराचंद को परिवहन विभाग में एडिशनल कमिशनर नए चेहरे मन्नालाल रावत के सामने प्रत्याशी बनाया गया है। बृजेन्द्र ओला के सामने बीजेपी ने अभी टिकट अनाउंस नहीं किया है।

करण सिंह : कम्पाउंडर से नेता और अब लोकसभा प्रत्याशी
करण सिंह उचियारड़ा मूलत: जोधपुर के नजदीक उचियारड़ा गांव के रहने वाले हैं। वो पहले जालोर में सायला के हॉस्पिटल में सरकारी कंपाउंडर थे।
साल 1990 में उनको यहां मेल नर्स ग्रेड 2 के पद पर पोस्टिंग मिली थी। 2 साल बाद उन्होंने ये नौकरी छोड़ दी और भादरा जून चले गए और कुछ समय बाद उन्होंने जालोर में आशापूर्णा रियल स्टेट कंपनी खोल ली, जो काफी सफल रही।
इसके बाद वो रियल स्टेट के बिजनेस से जुड़ गए। कुछ समय बाद उन्होंने जोधपुर में भी अपने प्रोजेक्ट शुरू किए। यहीं पॉलिटिकली एक्टिव हुए और कांग्रेस से जुड़ गए।
साल 2007 में वो पूर्व सीएम अशोक गहलोत की अगुवाई में अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में आधिकारिक रूप से जुड़ गए।
वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव करण सिंह साल 1999 में सामाजिक न्याय मंच के युवा प्रदेशाध्यक्ष रहे थे। इसके अलावा वो पीसीसी सदस्य व पीसीसी प्रदेश सचिव के पद पर भी रहे हैं।
करण सिंह साल 2009 से लेकर साल 2023 तक जोधपुर लोकसभा, लोहावट विधानसभा व सुमेरपुर विधानसभा से कांग्रेस का टिकट मांग चुके हैं, लेकिन उन्हें हर बार निराशा हाथ लगती थी।
- दिल्ली में था, टीवी पर देखा अनाउंसमेंट : करण सिंह उचियारड़ा ने बताया कि जब टिकटों का अनाउंसमेंट होना था। उससे पहले ही दिल्ली पहुंच गया था। TV देख रहा था। तभी पता चला कि जोधपुर से मुझे लोकसभा प्रत्याशी बनाया गया है। इसके बाद तो घर-परिवार, दोस्तों और पार्टी के लोगों के फोन आने शुरू हो गए। उन्होंने बताया कि जब मैं कंपाउंडर था तब महज 2 रुपए के लिए 2 किलोमीटर पैदल चलके मरीजों के इंजेक्शन लगाने जाता था और अब आज ये दिन आया है।

सचिन पायलट के साथ करण सिंह उचियारड़ा। करण सिंह शुरुआत में जालोर में सायला के हॉस्पिटल में सरकारी कंपाउंडर थे।
ताराचंद मीणा : आईएएस से सीधे लोकसभा प्रत्याशी बने
पाली जिले के मूल निवासी ताराचंद मीणा उदयपुर में जिला कलेक्टर रहे हैं। वे अजनजाति आयुक्त के पद पर थे और बाद में उनको एपीओ किया गया था।
2 दिन पहले ही उनका वीआरएस मंजूर हुआ है, लेकिन ये 20 मार्च से प्रभावी होगा। ताराचंद ग्रेजुएट (आट्र्स) हैं और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खास माने जाते हैं।
उदयपुर में कलेक्टर रहते हुए वे यहां आदिवासी क्षेत्र में सक्रिय हो गए थे। उन्होंने झाड़ोल-कोटड़ा में आदिवासी बेल्ट पर फोकस किया था।
झाडोल विधानसभा सीट से भी कांग्रेस प्रत्याशी बनाने को लेकर उनका नाम चला था। अब उन्हें सीधे लोकसभा प्रत्याशी बनाया गया है।
- टिकट मिला तब जयपुर में ही थे : आईएएस ताराचंद मीणा ने बताया कि वीआरएस उन्होंने निजी कारणों के चलते लिया है। इसका चुनाव से कोई संबंध नहीं है। अब कांग्रेस ने उन्हें प्रत्याशी बनाया है। मीणा बोले- फिलहाल 20 मार्च तक सेवा नियमों के तहत कुछ ज्यादा नहीं बता सकता हूं। जब टिकट का अनाउंसमेंट हुआ तो मैं जयपुर ही था। वहां टीवी से ही पता चला कि मुझे उदयपुर से प्रत्याशी बनाया है।

ताराचंद मीणा उदयपुर में जिला कलेक्टर रहे हैं। मीणा अब लोकसभा चुनाव मैदान में हैं।
ललित यादव : छात्र नेता से विधायक बने ललित, अब लड़ेंगे लोकसभा चुनाव
अलवर जिले की नीमराना तहसील के फौलादपुर के रहने वाले ललित यादव ने राजस्थान विश्वविद्यालय में बतौर छात्र नेता पॉलिटिक्स में आए थे। इसके बाद ललित ने मुंडावर से BSP के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और हार गए थे।
साल 2023 में उन्हें इसी सीट पर कांग्रेस ने अपना विधानसभा प्रत्याशी बनाया। इस बार वो करीब 35 हजार वोटों से जीते और विधायक बने। जिले की 11 विधानसभा सीटों में से सबसे अधिक वोट उन्हें ही मिले थे।
- एक दिन पहले ही पता चल गया था टिकट मिलने वाला है : ललित यादव ने बताया कि जब टिकट की घोषणा हो रही थी। तब वो किसी काम के चलते दिल्ली में साउथ एवेन्यू में थे। हालांकि उन्हें खुद को टिकट मिलने का अंदाजा एक दिन पहले ही हो गया था। पार्टी नेताओं की तरफ से संकेत मिलने लग गए थे। इसके बाद वहीं साउथ एवेन्यू में होने के दौरान दोस्त का कॉल आया और उसने कहा कि कांग्रेस लिस्ट में आपका नाम आ गया है। मैंने वॉट्सऐप चेक किया और पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल देखे तो कन्फर्म हो ही गया। इसके बाद सभी के फोन आने शुरू हो गए थे।

गांधी परिवार के साथ ललित यादव। ललित ने बतौर छात्र नेता राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी।
409 वोट से हारी कॉन्स्टेबल की पत्नी संजना अब लोकसभा प्रत्याशी
25 वर्षीय संजना जाटव मूलरूप से राजस्थान के अलवर जिले की कठूमर तहसील के गांव समूंची की रहने वाली हैं। संजना का पीहर भरतपुर के भूसावर में है।
पति अलवर के खेड़ली कस्बा निवासी कप्तान सिंह राजस्थान पुलिस में कॉन्स्टेबल हैं। वे अलवर के थानागाजी थाने में तैनात हैं।
संजना जाटव को प्रियंका गांधी के करीबी युवा नेताओं में से एक माना जाता है। ये गांधी के अभियान ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ से भी जुड़ी हुई हैं।
दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में संजना ने काफी काम किया था। तभी उनकी मुलाकात राहुल गांधी से हुई थी।
इसके बाद संजना ने 2023 में अलवर जिले की कठूमर सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था। संजना को भाजपा के रमेश खींची के सामने महज 409 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। अब उन्हें सीधे लोकसभा प्रत्याशी बनाया गया है।
- क्षेत्र में थी तब कॉल आया : संजना जाटव ने बताया कि मंगलवार को वो दिन भर क्षेत्र के दौरे पर थीं। शाम में उन्हें भंवर जितेंद्र सिंह का पहला कॉल आया और उन्होंने ही बधाई देते हुए बताया कि पार्टी ने लोकसभा प्रत्याशी बनाया है।

संजना ने एलएलबी तक की पढ़ाई की है और अलवर जिला परिषद सदस्य भी रह चुकी हैं।
8वीं बार ओला परिवार को लोकसभा टिकट, बृजेन्द्र पहली बार लड़ेंगे
झुंझुनूं लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने 8वीं बार ओला परिवार पर ही भरोसा जताया है। इस बार MLA बृजेन्द्र ओला को टिकट दिया गया है।
लगातार चार बार से झुंझुनूं के विधायक और दो बार मंत्री रहे बृजेन्द्र पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले इस सीट पर उनके पिता शीशराम ओला 6 बार चुनाव लड़ चुके हैं।
साल 1980 में वो अपना पहला चुनाव हार गए थे। इसके बाद लगातार 5 चुनाव वो यहां से जीते। उनके निधन के बाद साल 2014 में उनकी पुत्रवधू राजबाला ओला को यहां से प्रत्याशी बनाया गया था लेकिन वो चुनाव हार गई थीं। अब कांग्रेस ने दुबारा से इसी परिवार में जीत का रास्ता तलाशने का प्रयास किया है।
72 साल के बृजेन्द्र ओला ने साल 1988 में अरड़ावता सरपंच के तौर पर अपनी सियासी पारी का आगाज किया था। इसके बाद सरपंच रहते ही वो जिला प्रमुख भी बने।
दो बार झुंझुनूं जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। पहली बार 1996 में विधानसभा उपचुनाव लड़ा और हार गए। 1998 व 2003 का चुनाव भी वे हार गए।
लगातार तीन चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने ओला पर अपना भरोसा कायम रखा। 2008 में ओला चुनाव जीते व गहलोत सरकार में राज्य मंत्री बने। इसके बाद ओला साल 2013 और साल 2018 का विधानसभा चुनाव भी जीते।
साल 2018 में वे सड़क सुरक्षा व परिवहन मंत्री बने। इसके बाद साल 2023 में वो परिवहन मंत्री रहते हुए लगातार चौथी बार चुनाव जीते। ये राजस्थान में पहली बार हुआ था कि कोई परिवहन मंत्री रहते विधानसभा चुनाव जीता हो।

लगातार तीन बार हारने के बाद 2008 में बृजेन्द्र ओला पहली बार चुनाव जीते थे। 2023 तक वे चार लगातार चुनाव जीतते रहे।





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