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डेमोग्राफिक डिविडेंड में होगा बड़ा बदलाव, भारत की इकॉनमी को मिलेगा फायदा ! New Delhi News

डेमोग्राफिक डिविडेंड में होगा बड़ा बदलाव, भारत की इकॉनमी को मिलेगा फायदा



नई दिल्ली। दुनिया में भारत को सबसे युवा देश कहा जाता है। हमारे देश मे 35 साल के युवाओं की जनसंख्या विश्व के अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा है। यूनाइटेड नेशन्स की एक रिपोर्ट के अनुसार 2018 से भारत में डेमोग्राफिक डिविडेंड में बड़ा बदलाव हुआ है। पिछले साल से भारत में वर्किंग एज पॉपुलेशन (15 से 64 वर्ष आयु वर्ग) में काफी वृद्धि दर्ज की गई है। ये आश्रित वर्ग (14 साल के नीचे और 65 से ऊपर) की जनसंख्या की तुलना में तेजी से आगे बढ़ रही है। संभावना है कि यह अस्थाई वृद्धि अगले 37 सालों तक यानी 2055 तक बनी रहेगी। ऐसे में भारत की इकॉनमी को फायदा होगा।


संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया के प्रमुख आर्थिक देश जापान, चीन और दक्षिण कोरिया इस डेमोग्राफिक डिविडेंड को उपयोग में लाने में सक्षम थे। इस वजह से इन देशों ने आर्थिक प्रगति तेजी से की। जापान इनमें एक ऐसा देश है जिसने पापुलेशन स्ट्रक्चर में बदलाव करके आर्थिक वृद्धि में तेजी और सुधार दर्ज करवाया है।

बता दें कि, जापान में डेमोग्राफिक डिविडेंट 1964 से 2004 तक रही। इस दौरान जापान की इकोनॉमी डबल डिजिट को छूने में कामयाब रही। वहीं चीन 1978 में किए बदलाव के बूते 16 साल बाद 1994 में इस स्टेज को छूने में कामयाब हुआ। इसी का नतीजा है कि चीन की गिनती आज विश्व के प्रमुख आर्थिक देशों में होती है।
वहीं, सिंगापुर में भी डेमोग्राफिक डिविडेंड 1979 में शुरू हुई और अगले 10 साल में ही इसका काफी फायदा दिखा। पिछले 10 साल की बात करें तो सिंगापुर की इकोनॉमी डबल डिजिट के आंकड़े को छू गई है। साउथ कोरिया और हांगकांग जैसे देश ने भी क्रमशः 1987 और 1979 में डेमोग्राफिक डिविडेंड को अपनाया जिसके कारण इन देशों ने भी अपनी इकोनॉमी को बेहतर स्थिति में पाया है।
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