
अहमदाबाद। मेरा बेटा आरिफ देश की रक्षा के लिए शहीद गया, जहां उससे बिछड़ने का गम है वहीं उसकी शहादत पर गर्व है। कल तक लोग मुझे पहचानते नहीं थें। आज मुझे लोग शहीद के पिता के नाम पर नयी पहचानने लगे हैं। मैं अपने दूसरे बेटे को भी देश की रक्षा के लिए सेना में भेजूंगा। यह बोल थे शहीद के पिता सफी आलम के।
जम्मू कश्मीर में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए वड़ोदरा के आरिफ का पार्थिव देंह आज उसके निवास स्थान पर पहुंच गया। दोपहर 3 बजे गार्ड आफ ओनर के साथ शहिद आरिफ को अंतिम विदाई जी जायेगी। शहिद के पार्थिव देह के अंतिम दर्शन के लिए भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
मूलतः उत्तरप्रदेश के कासगंज के बरेगन गांव निवासी आरीफ के पिता सफी आलम नम आंखों से कहते है कि वे रेलवे में खालासी की नौकरी करते थे। निम्न मध्यम वर्ग सफी आलम की किसी से पहचान नहीं थी। परन्तु आज उनसे मिलने के लिए कलेक्टर, कमिश्नर, सांसद, सेना के बड़े-बड़े जवन आफसरों सहित स्थानीय विविध पार्टियों के लोगों का जमावड़ा है। नवायार्ड के अमन पार्क में उनके मकान के बाहर पंडाल बनाया गया है। जहां उसके बेटे शहीद आरिफ का शव रखा गया है।
अपने बेटे की स्मृति को ताजा करते हुए सफी आलम ने कहा कि उसे सेना में भर्ती होने का बचपन से ही शौक था। तब में कोटा में रेलवे के ट्यूटोरियल आर्मी में थे। जब मैं नौकरी से वापस आता था तब वह मेरा यूनिफोर्म पहनकर कहता कि पापा मुझे भी आर्मी में भर्ती होना है। मैं जब रहने के लिए वड़ोदरा आया तब उसने आर्मी में शामिल होने के लिए फिजिकल ट्रेनिंग शुरु की। वह खेल कूद और पढ़ने लिखने में हशियार था।
एक दिन उसने कहा पापा मुझे बस का किराया दो मुझे बहन से मिलने के लिए जाना है। मैने उसे 200 रुपये दिए। वह मेहसाणा गया और बिना मुझे पूछे ही मिलेट्री में भर्ती हो गया। आर्मी में भर्ती होने जबलपुर में उसकी ट्रेनिंग हुई। ट्रेनिंग के दौरान वह शूटिंग में हमेशा आगे रहता। ट्रेनिंग के बाद जम्मू के अखनूर में उसकी पोस्टिंग हो गयी।
उन्होंने कहा कि दो दिन पूर्व ही रविवार को उससे फोन पर बात हुई। वह बहुत खुश था। उसने कहा कि उसे रहने और भोजन की कोई तकलीफ नहीं है। उसने कहा कि वह बाद में फोन करेगा। उसके बाद दूसरे दिन सुबह उसके वहां से फोन आ कि आरिफ को गोली लगी है। उसे चिकित्सा के लिए हेलिकोप्टर से उधमपुर ले जाया जा रहा है। उसके बाद उसकी शहादत का समाचार मिला। आरिफ की शहादत की खरब सुनते ही उसकी मां का बुरा हाल है। वह चुपचाप है किसी कुछ बात नहीं कर रही हे बस रौये जा रही है।



