
इस्तांबुल। चीन की नीतियों की आलोचना करने वाला एकमात्र मुस्लिम बहुल देश तुर्की है और उसने हजारों उईगर शरणार्थियों को शरण दी है। मगर, यहां चीनी मुस्लिम शरणार्थियों को डर है कि उन्हें वापस चीन में भेजा जा सकता है। दरअसल, एक उईगर शरणार्थी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि वह घबराया हुआ है क्योंकि उसे डर है कि उसे वापस चीन भेजा जा सकता है। वह बीते दो महीने से अधिक समय तक इस्तांबुल के पास निर्वासन केंद्र में हिरासत में है।
हाल ही में इस अफवाह के बाद उईगर मुस्लिम समुदाय में डर फैल गया है कि कुछ उईगरों को चीन में निर्वासित किया जा रहा है। विशेष रूप से एक महिला और उसके दो बच्चों को, जिन्हें ताजिक पासपोर्ट दिया गया था और ताजिकिस्तान ले जाया गया था जहां से उन्हें वापस चीन भेजा गया था।
ताजा मामला 29 वर्षीय अहेमीती जियानमिक्सीडिंग का है, जिसके पास तुर्की निवास और वर्क परमिट है। वह इस्तांबुल में कार की एसेसरीज बनाने का कारखाना चलाता है। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, उसे 30 मई को गिरफ्तार किया गया था। बताया जा रहा है कि वह उईगर राष्ट्रीय आंदोलन नाम के एक आतंकवादी संगठन के मुख्य फाइनेंसरों में से एक है। हालांकि, इस मामले की जांच चल रही है।
अहेमीती ने शनिवार को किर्कलारेली के उत्तर-पश्चिमी प्रांत में पेहलिवानकोय निर्वासन केंद्र से एएफपी को फोन पर बताया कि मैंने इस संगठन के बारे में पहले कभी नहीं सुना था। उसने कहा कि चीन में उसके रिश्तेदारों को हाल ही में अपने प्रत्यावर्तन का अनुरोध करने वाले कागजात पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था। उसे डर है कि तुर्की सरकार पर उसके निर्वासन के लिए सहमत होने के दबाव के रूप में ऐसा किया गया था।
मुझे चिंता है क्योंकि मुझे पता है कि चीन के पास इसे हासिल करने की क्षमता है। मैंने उईगरों के बारे में सुना है, जिन्हें तुर्की से ताजिकिस्तान और वहां से चीन भेजा गया था। मुझे डर है कि मेरे साथ भी ऐसा ही होगा। उनकी पत्नी ने रविवार को कहा कि उसे इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि उन्हें नियमित जेल के बजाय निर्वासन केंद्र में क्यों रखा गया था।
बताते चलें कि उत्तरपश्चिम चीन में उईगर समुदाय ने हाल के वर्षों में एक तीव्र दमन का सामना किया है। एक अनुमान के अनुसार, ज्यादातर दस लाख मुस्लिम जातीय अल्पसंख्यकों को प्रताणना शिविरों में रखा जाता है, जिसे बीजिंग “व्यावसायिक शिक्षा केंद्र” कहता है।
यहां से निकलने वाले मुस्लिमों ने दावा किया कि इन शिविरों में उनके साथ अमानवीय व्यवहार होता है। उन्हें सुअर का मांस खाने के लिए दिया जाता है, जिसे वे हराम मानते हैं। इसके अलावा शराब पीने को मजबूर किया जाता है, कुरान पढ़ने पर पाबंदी है, लोगों को धार्मिक प्रतीकों जैस दाढ़ी रखने पर सजा दी जाती है। लिहाजा, चीन के उईगर मुस्लिम इन शिविरों में जाने से डरते हैं।





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