
रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मरीजों को बेहतर सुविधा के लिए पांच पद्धतियों से इलाज किया जा रहा है। इसमें आयुर्वेद, योग, सिद्धा, यूनानी और एलोपैथिक शामिल हैं। संस्थान में सभी पद्धतियों के विशेषज्ञ इलाज के लिए विचार-विमर्श कर मरीज को बेहतर इलाज देने की कवायद कर रहे हैं। इनमें लकवा, एलर्जी, पित्त की बीमारी के लिए सिद्ध मेडिसिन और आयुर्वेद से इलाज किया जा रहा है।
वहीं चर्म रोग और सूखी खांसी के लिए यूनानी पद्धति का इस्तेमाल किया जा रहा है। गौरतलब बात है कि प्रदेश में एम्स ऐसा संस्थान बन गया है, जहां चिकित्सा की सभी पद्धति से मरीज का इलाज किया जा रहा है।
प्रबंधन का कहना है कि मरीज को प्राथमिक स्टेज में एलोपैथिक से ही इलाज किया जाता है। दवाइयां यदि उतना कारगर नहीं हुईं तो अन्य पद्धतियों के विभागों में भेजा जाता है। अन्य पद्धतियों में इलाज के दौरान मरीज स्वस्थ होने लगता है तो उक्त पद्धति से ही उसका निरंतर इलाज किया जाता है।
केस- एक
बिलासपुर के रहने वाले अनिल सिंह को लंबे वर्षों से एलर्जी की समस्या थी। अनिल बताते हैं कि एम्स में जनरल मेडिसिन विभाग में एलर्जी का इलाज करा रहा था। डॉक्टरों ने यूनानी पद्धति में इलाज कराने की सलाह दी और अब एलर्जी की समस्या कम हो गई है।
केस – दो
कमर दर्द के लिए सिद्धा मेडिसिन
कमला देवी ने भिलाई से निरंतर कमर दर्द के लिए हड्डी रोग विभाग एम्स में इलाज करवाया। कमला ने बताया कि इसी दौरान उन्हें सिद्धा मेडिसिन विभाग का पता चला। करीब छह माह से निरंतर वहां इलाज करवा रही हूं। लगभग आधी दर्द कम हो गई है।
विशेषज्ञ के अनुसार फायदे
एम्स के उपअधीक्षक डॉ. करन पीपरे ने बताया कि समय-समय पर सभी पद्धतियों के विभागाध्यक्षों की बैठक होती है। साथ ही मरीजों के इलाज के लिए चर्चा की जाती है। विभाग लंबी बीमारी को दूर करने के लिए अन्य पद्धतियों पर इलाज करने की सलाह दी जाती है। डाक्टर स्वंय मरीज को अन्य पद्धतियों में इलाज के लिए सलाह दे रहे हैं। इसकी वजह है कई मरीजों को आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध मेडिसिन व अन्य पद्धतियों से निजात मिल जाती है।
फैक्ट फाइल (प्रतिदिन मरीज)
आयुर्वेद पद्धति – 10-15
योग- 15- 20
सिद्धा मेडिसिन- 25-30
यूनानी- 12- से 15





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