
मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने प्रदेश में आवश्यकता के अनुसार संभाग और जिलों की सीमाओं के पुर्ननिर्धारण की बात कही है। इसके लिए एक कमेटी बनाई जाएगी, जो इसका अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट देगी। शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इंदौर संभाग से की जाएगी।
सीएम ने थानों की सीमाओं का पुर्ननिर्धारण भी जल्दी करने को कहा है। सीएम ने खरगोन में इंदौर संभाग की समीक्षा बैठक ली, जिसमें प्रशासनिक दृष्टि से जनता की सुविधाओं के हिसाब से संभाग, जिलों की सीमाएं तय करने को कहा।
जरूरत: अभी मुख्यालय से दूरी 150 किमी तक
- इंदौर संभाग के बड़वानी जिले की सीमा बड़वानी शहर से 4 किमी दूर खत्म हो जाती है। इस सीमा से धार जिले की कुक्षी और निसरपुर तहसील लगी हैं। जिला मुख्यालय 100 किमी से ज्यादा दूर है। कुक्षी और निसरपुर तहसील को बड़वानी में शामिल कर दें तो दोनों की दूरी 10 से 12 किमी रह जाएगी।
- मंडीदीप की सीमाएं भोपाल से 10 किमी है और मंडीदीप का जिला मुख्यालय रायसेन है। लोगों को रायसेन के लिए 70 किमी दूर भोपाल आना पड़ता है। शेष | पेज 16 प
- मालनपुर भिंड जिले में है और ग्वालियर जिले से 16 किमी है। पीथमपुर इंदौर से सटा है, पर जिला मुख्यालय धार 70 किमी है।
- बसई तहसील दतिया में आती है। बसई से दतिया जाने के लिए 90 से 100 किमी की दूरी और जाने के लिए झांसी (यूपी) होकर जाना होता है, जबकि बसई की सीमाएं निवाड़ी जिले से लगी हैं।
कोलार थाने की सीमाएं 45 किलोमीटर तक फैली
मप्र में कोलार सबसे बड़ा थाना है जिसकी सीमाएं 45 वर्ग किलोमीटर में फैली हैं, इस थाने की सीमाएं रायसेन जिले के मंडीदीप थाने से लगी हैं। कोलार थाने के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र मंडीदीप और चूनाभट्टी थाने में शामिल किया जा सकते हैं। हालांकि कोलार थाने का क्षेत्र बड़ा होने से इसमें से कजलीखेड़ा नया थाना बनाया जाना प्रस्तावित है।
संभागों की सीमाओं में भी हो सकता है फेरबदल
नर्मदापुरम संभाग में सिर्फ तीन जिले हैं इससे नरसिंहपुर जिले की सीमाएं लगी हुई है, अभी नरसिंहपुर का संभागीय मुख्यालय जबलपुर है। नर्मदापुरम संभाग में नरसिंहपुर जिला शामिल किया जा सकता है। अभी जबलपुर संभाग में 8 जिले हैं। इसी तरह शहडोल जिले में तीन जिले हैं, डिंडोरी जिला शहडोल से लगा हुआ है। इसे जबलपुर संभाग से अलग कर शहडोल में मिलाया जा सकता है।











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