भोपाल

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पूर्व सीएम कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद से हटाकर पिछले साल 16 दिसंबर को जीतू पटवारी एमपी के नए पीसीसी चीफ बनाए गए थे। पटवारी को पीसीसी प्रेसिडेंट के तौर पर दो महीने पूरे हो चुके हैं। लेकिन, वे बिना टीम के ही काम कर रहे हैं।
भूरिया बोले-चर्चा करके ही हाईकमान को सूची उपलब्ध कराएंगे
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर पटवारी को दो महीने बीतने के बाद भी टीम ना बन पाने के मामले पर पूर्व मंत्री कांतिलाल भूरिया ने कहा- ‘जीतू पटवारी सबसे नाम ले रहे हैं। विधायकों, जिला कांग्रेस और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करके ही हाईकमान को सूची उपलब्ध कराएंगे। जीतू पटवारी कल ही मुझे मिले थे। वे बता रहे थे कि सब कम्पलीट हो गया है। चूंकि राहुल गांधी यात्रा में व्यस्त हैं। उनको भी दिखाना है। हाईकमान सोनिया जी, खरगे साहब को बताकर ही आगे बढ़ेंगे।’
रावत बोले-मैं बड़ा नेता नहीं, टाइम पास कर रहा हूं
पीसीसी की टीम ना बन पाने को लेकर कांग्रेस के सीनियर लीडर और विजयपुर विधायक रामनिवास रावत से जब पूछा गया तो वे बोले- ये उनसे (पटवारी) से पूछो। रावत से पूछा कि आप भी वरिष्ठ नेता हैं तो उन्होंने जवाब दिया- भैया मैं वरिष्ठ नेता नहीं हूं। अपना टाइमपास कर रहा हूं।
आम सहमति बनाने के चक्कर में नहीं बन पा रही टीम
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेश कार्यकारिणी बनाने के लिए कांग्रेस के नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। कई कार्यकर्ताओं को पदाधिकारी बनाने का विधानसभा चुनाव लड़े नेता ही विरोध कर रहे हैं। वहीं कई दिग्गजों ने भी कुछ लोगों को प्रदेश पदाधिकारी बनाने को कहा है। ऐसे में सबकी सहमति नहीं बन पा रही है। जीतू की टीम में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी, अरुण यादव, अजय सिंह जैसे नेताओं की पसंद-नापसंद का भी ख्याल रखना चुनौती बन रहा है।

एमपी कांग्रेस के नेताओं की नियुक्ति के बाद जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, हेमंत कटारे ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी।
कमलनाथ ने बनाए थे 50 उपाध्यक्ष, 105 महामंत्री
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने कार्यकाल में जब पीसीसी की टीम बनाई थी। तब 50 उपाध्यक्ष, 105 महामंत्री, और करीब 60 सचिव नियुक्त किए थे। चंद्रप्रभाष शेखर को प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ संगठन प्रभारी और राजीव सिंह को प्रशासन का प्रभारी बनाया था। हालांकि विधानसभा चुनाव के पहले संगठन का प्रभार राजीव सिंह को दिया गया था।

16 दिसंबर को जीतू पटवारी को पीसीसी चीफ, उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष और हेमंत कटारे को उप नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था।
ये 50 नेता कमलनाथ के वक्त बने थे प्रदेश उपाध्यक्ष
अभय दुबे, अजय चौरड़िया, अजय शाह, अजीता वाजपेई पांडेय, अर्चना जायसवाल, अशोक सिंह, आशुतोष वर्मा, बालेंदु शुक्ल, बटुक शंकर जोशी, चंद्र प्रभाष शेखर, दीपक सक्सेना, गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, गंगा तिवारी, गोविंद गोयल, हामिद काजी, जेपी धनोपिया, खिजर मुहम्मद कुरैशी, लाल चंद गुप्ता, महेंद्र जोशी, महेन्द्र सिंह चौहान, मानक अग्रवाल, माणिक सिंह, मुजीब कुरैशी, नन्हें लाल धुर्वे, नरेंद्र नाहटा, नेहा सिंह, नूरी खान, फूल सिंह बरैया, प्रकाश जैन, प्रताप भानु शर्मा, प्रताप सिंह लोधी, राज कुमार पटेल, राजा राम त्रिपाठी, राजीव सिंह, रामप्रकाश यादव, राम गरीब वनवासी, रामेश्वर नीखरा, रामसेवक गुर्जर, साजिद अली, संजय सिंह मसानी, संजीव मोहन गुप्ता, शोभा ओझा, सुभाष सोजतिया, स्वप्निल कोठरी, सैयद साजिद अली, तिलक सिंह लोधी, तारा चंद पटेल, वीके बाथम, वीरेंद्र तिवारी, विश्वेश्वर भगत।
जीतू पटवारी ने भंग कर दी थी प्रदेश की टीम
पीसीसी चीफ बनने के हफ्ते भर बाद ही जीतू पटवारी ने जिला अध्यक्षों और जिला प्रभारियों को छोड़कर एमपी कांग्रेस की पूरी कार्यकारिणी भंग कर दी थी। हालांकि इसके बाद भी कई नेताओं को उन्होंने अनौपचारिक तौर पर काम करते रहने को कहा था। कार्यकारिणी भंग करने के पहले पीसीसी में प्रदेश प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने भोपाल में कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक की थी।










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