
भोपाल। मुलताई विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम को मारने के लिए भोपाल स्टेशन पर गुंडे बुलाने वाले दो लोग (एक पुरुष व एक महिला) बीना से मंत्री आरिफ अकील का नाम लेकर चढ़े थे। मंत्री का नाम सुनते ही टीटीई ने भी दोनों को बैठाने में हमदर्दी दिखा दी। बाद में ये ही ट्रेन में बैठे पूर्व विधायक से भिड़ गए। नौबत मारपीट तक पहुंच गई। ट्रेन के भोपाल पहुंचने पर कुछ गुंडे भी आ गए। पूरे फसाद की वजह में टीटीई की भूमिका भी जिम्मेदार है। यदि टीटीई दोनों को बाहर कर देते तो विवाद नहीं होता। यह खुलासा पूर्व विधायक द्वारा की गई शिकायत में हुआ है। टीटीई का नाम आरके जैन बताया जा रहा है।
टीटीई की भूमिका इसलिए संदिग्ध
जब दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था तो सबसे पहले टीटीई को वैध टिकट लेकर यात्रा करने वाले पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम को सहयोग करना था। बीना से चढ़े दोनों यात्रियों को बाहर खदेड़ना था क्योंकि उनके पास टिकट नहीं था जो कि टीटीई ने नहीं किया। इसके अलावा टीटीई ने कंट्रोल रूम को घटनाक्रम का मैसेज भी नहीं दिया। डॉ. सुनीलम की माने तो मामले को बढ़ता देख टीटीई बात से पलट गए। कहने लगे कि दोनों को मैंने बैठाने में कोई सहयोग नहीं किया।
गजब की जीआरपी, सीसीटीवी से फुटेज खंगाले न टीटीई के बयान लिए
मामले में भोपाल जीआरपी का रवैया सबसे ढीला रहा है। इसका नतीजा यह है कि घटना के दूसरे दिन बुधवार शाम तक जीआरपी ने भोपाल स्टेशन पर लगे सीसीटीवी फुटेज तक नहीं खंगाले। इन्हीं फुटेजों के आधार पर पूर्व विधायक को जान से मारने वालों की पहचान की जा सकती है।
आरपीएफ की रिपोर्ट में बर्थ पर नहीं मिले पूर्व विधायक
इधर, आरपीएफ ने मामले की जांच रिपोर्ट जोन को भेज दी है। रिपोर्ट में भोपाल स्टेशन पर पदस्थ सब इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह ने बताया है कि वे ट्रेन के भोपाल पहुंचने पर बी-1 कोच के बर्थ 17 पर गए थे। उन्हें शिकायतकर्ता यात्री व पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम बर्थ पर नहीं मिले थे। आसपास की बर्थ पर बैठे यात्रियों के बयान भी रिकॉर्ड किए हैं। एक यात्री ने विवाद को सही बताया है। वहीं, पूर्व विधायक ने कहा है कि वे अपनी जान बचाने के लिए शौचालय में छिपे थे तो बर्थ पर कहां से मिलते थे।
जांच कर रहे हैं
जांच चल रही है अभी तक धमकाने वालों का सुराग नहीं लगा है। सीसीटीवी फुटेज नहीं देखे हैं उन्हें भी देखा जाएगा।
– मनीष अग्रवाल, एसआरपी रेल भोपाल
रेलवे ने झूठ बोला
ट्वीटर पर आरपीएफ ने शिकायत का निराकरण हो गया है, कहकर झूठ बोला है। मैं नींद में था मैंने नहीं कहा कि शिकायत का निराकरण हो गया। टि्वटर पर यदि ये झूठ चल रहा है तो आम यात्रियों की क्या स्थिति होगी। टीटीई दोनों को कोच से खदेड़ देता तो यह नौबत ही नहीं आती। किसी भी जनप्रतिनिधि के नाम का उपयोग कर लेने मात्र से आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को प्रवेश क्यों दिया गया।





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