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मंगल गृह पर जमीन के 65 फीट नीचे था पानी NASA के रोवर से पुष्टि: रोवर को भेजा था जीवन की संभावना तलाशने के लिए /#INTERNATIONAL

ये फुटेज पर्सीवरेंस मार्स रोवर के लैंडिंग की है। (क्रेडिट- नासा)

मंगल ग्रह पर पानी होने की पुष्टि हो गई है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के पर्सीवरेंस रोवर के डेटा से इसकी पुष्टि हुई है। पर्सीवरेंस रोवर की मार्स की सबसे खतरनाक सतह जजीरो क्रेटर पर लैंडिंग हुई थी। इसमें यहां से चट्टानों के सैंपल कलेक्ट किए थे। साथ ही जमीन की नीचे पानी की खोज के लिए ऐक्सपैरिमैंट किया था।

अब साइंटिस्ट को इसके डेटा से पता चला है कि मार्स की जमीन के 65 फीट नीचे मिट्टी के कणों में नमी है। उनका कहना है कि जजीरो क्रेटर मंगल ग्रह की वह सतह है, जहां कभी विशाल झील हुआ करती थी। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगर मंगल पर कभी जीवन था, तो उसके संकेत यहां जीवाश्म के रूप में मिल सकेंगे।

पर्सीवरेंस रोवर का वजन 1000 किलोग्राम है। यह परमाणु ऊर्जा से चलता है।

पर्सीवरेंस रोवर का वजन 1000 किलोग्राम है। यह परमाणु ऊर्जा से चलता है।

जजीरो क्रेटर पर क्यों हुई लैंडिंग
साइंटिस्ट का मानना था कि जजीरो क्रेटर पर पानी हुआ था, इसकी पुष्टि के लिए पर्सीवरेंस रोवर को यहां उतारा गया था।

पर्सीवरेंस मार्स रोवर 18-19 फरवरी 2021 की रात मंगल पर पानी की पुष्टि और जीवन की तलाश के लिए उतरा था। इसने भारतीय समय के अनुसार रात करीब 2 बजे मार्स की सबसे खतरनाक सतह जजीरो क्रेटर पर लैंडिंग की थी।

पर्सीवरेंस रोवर ने सबसे सटीक लैंडिंग की थी
NASA ने दावा किया था कि पर्सीवरेंस की लैंडिंग अब तक के इतिहास में रोवर की मार्स पर सबसे सटीक लैंडिंग थी। 6 पहियों वाला यह रोवर सात महीने में 47 करोड़ किलोमीटर की यात्रा पूरी कर तेजी से अपने लक्ष्य के करीब पहुंचा था। आखिरी सात मिनट बेहद मुश्किल और खतरनाक रहे थे। इस वक्त यह सिर्फ 7 मिनट में 12 हजार मील प्रतिघंटे से 0 की रफ्तार पर आ गया था। इसके बाद लैंडिंग हुई थी।

मार्स पर लैंडिंग के बाद पर्सीवरेंस मार्स रोवर ने ये इमेज क्लिक कर पृथ्वी पर भेजी। (क्रेडिट- नासा)

मार्स पर लैंडिंग के बाद पर्सीवरेंस मार्स रोवर ने ये इमेज क्लिक कर पृथ्वी पर भेजी। (क्रेडिट- नासा)

रोवर ने ऑडियो रिकॉर्डिंग भेजी थी
लॉन्चिंग के कुछ दिन बाद ही पर्सीवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की पहली ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी की थी। 10 सेकेंड की इस ऑडियो क्लिप में बहुत मामूली आवाज थी। नासा के मुताबिक, यह उसके पर्सीवरेंस रोवर के उतरने के बाद वहां मौजूद धूल और मिट्टी पर पड़े दबाव की वजह से पैदा हुई थी।

करीब 1 महीने बाद मार्च में इस रोवर ने करीब 21.3 फीट तक टेस्ट ड्राइव की थी। इससे मंगल की मिट्‌टी पर उसके पहियों के निशान बन गए थे। NASA ने इन निशानों की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी।

फोटो अप्रैल 2020 की है। तब कैनेडी स्पेस सेंटर में नासा की मिशन मार्स टीम ने रोवर की फाइनल टेस्टिंग की थी।

फोटो अप्रैल 2020 की है। तब कैनेडी स्पेस सेंटर में नासा की मिशन मार्स टीम ने रोवर की फाइनल टेस्टिंग की थी।

पर्सीवरेंस रोवर का वजन एक हजार किलोग्राम
पर्सीवरेंस रोवर का वजन 1000 किलोग्राम है। यह परमाणु ऊर्जा से चलता है। पहली बार किसी रोवर में प्लूटोनियम को ईंधन के तौर पर उपयोग किया गया। यह रोवर मंगल ग्रह पर 10 साल तक काम करेगा। इसमें 7 फीट का रोबोटिक आर्म, 23 कैमरे और एक ड्रिल मशीन है।

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