है। इस मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौथी
बार तिरंगा फहराया और देश की जनता को संबोधित किया।
इसके बाद
प्रधानमंत्री ने लाल किला की प्राचीर से अपने भाषण में कहा, ‘देश की आजादी
और आन, बान, शान और गौरव के लिए बलिदान दिया। ऐसे सभी महानुभाओं और
माताओं-बहनों को मैं लाल किले की प्राचीर से नमन करता हूं। कभी-कभी
प्राकृतिक आपदाएं हमारे लिए बहुत बड़ी चुनौती बन जाती है। अच्छी वर्षा देश
को फलने फूलने में बहुत ही योगदान देती है। लेकिन जलवायु परिवर्तन का
नतीजा है कि कभी-कभी ये प्राकृतिक आपदा संकट भी मोल लेते हैं। पिछले दिनों
देश के कई हिस्सों में प्राकृतिक आपदा का संकट आया। एक अस्पताल में मासूम
बच्चों की जान गई। मैं यकीन दिलाता हूं कि ऐसे संकट के मौकों पर कुछ भी
करने में हम कमी नहीं छोड़ेंगे।’
उन्होंने कहा, ‘अभी पिछले सप्ताह
ही क्विट इंडिया मूवमेंट के 70 साल पूरे हुए। यह वर्ष है जब चंपारण आंदोलन
की शताब्दी मना रहे हैं। लोकमान्य तिलक जी ने सार्वजनिक गणेश उत्सव परंपरा
को प्रारंभ किया था उसके भी इस साल 125 साल पूरे हो रहे हैं। आज आजादी का
70 और 2022 में आजादी का 75 साल मनाएंगे। 1942 से 47 के बीच देशवासियों ने
अंग्रेजों के नाक में दम किया। अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना पड़ा।’
प्रधानमंत्री
ने कहा, ‘हमें 2022 में आजादी के दीवानों के सपनों के अनुरूप भारत बनाने
के लिए सवा सौ करोड़ देशवासियों के संकल्प और पुरुषार्थ से इस सपने को पूरा
करना है। सामूहिकता की शक्ति बहुत बड़ी होती है। प्रभु श्रीकृष्ण एक लकड़ी
लेकर खड़े हो गए और गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। श्रीराम को लंका जाना था
वानर सेना उनके साथ खड़ी हो गई। हर कोई अपनी जगह से 2022 के लिए एक नई
ऊर्जा, नए संकल्प के साथ परिवर्तन ला सकते हैं। न्यू इंडिया जो सुरक्षित
हो, समृद्धशाली हो। सबको समान अवसर उपलब्ध हों।





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