
मंडी प्रशासन की मिलीभगत सामने मिलीभगत से चल रहा है कारोबार
करैरा। करैरा की कृषि उपज मंडी में बोली लगने से पहले ही किसान की कृषि उपज व्यापारी खरीद रहे हैं हालांकि इसमें नुकसान किसानों का ही है लेकिन मंडी प्रशासन इसे खुली आंख से देख रहा है तथा व्यापारियों की मिलीभगत से इस खेल को अंजाम दिया जा रहा है
इसके पीछे मंडी कर्मचारियों की दलाली रहती है कि किसान जल्द से जल्द अपनी फसल को व्यापारी को बेचकर जाना चाहता है उसकी उपज भले ही उससे कम कीमत मिले लेकिन वह उसी व्यापारी को फसल देना चाहता है जिससे उसका उधार खाता चलता है सवाल यह है कि अगर मंडी में ऐसा हो रहा है तो हर किसान व व्यापारी अपनी मनमर्जी करेगा तो मंडी में बोली का कोई महत्व ही नहीं रह जाएगा
मंडी प्रशासन की मिलीभगत
मंडी सूत्रों की मानें तो इसके पीछे मंडी प्रशासन की मिलीभगत सामने आ रही है मंडी में आने वाले किसानों को व्यापारी पहले ही सेट कर लेते हैं और वह किसान उन्हीं के पास पहुंच जाते हैं दूसरी तरफ मंडी प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारियों को अपने कमीशन से मतलब है लिहाजा वे इस तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हैं
मंडी प्रशासन को नुकसान
व्यापारी और किसानों की मिलीभगत का सीधा नुकसान विभाग को उठाना पड़ रहा है विभाग को जितना राजस्व मिलना चाहिए उतना नहीं मिल रहा है जिसकी वजह से विभाग की स्थिति निरंतर डब्बाडोल होती जा रही है वहीं दूसरी तरफ विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मालामाल हो रहे हैं व्यापारी व अधिकारियों की मिलीभगत का खेल बरसो पुराना चल रहा है जिसकी वजह से आज भी विभाग में कर्मचारियों का वेतन समय पर नहीं मिल पाता है तथा जरूरत के निर्माण कार्य होने चाहिए वह नहीं हो पा रहे हैं
शासन के आदेशों की अवहेलना
शासन ने प्रदेश सभी मंडियों की नीलामी व्यवस्था इसी वजह से शुरू की है कि किसान को लाभ मिले लेकिन यहां कुछ कर्मचारियों व व्यापारी मिलकर शासन की पूरी व्यवस्था को चौपट करने में लगे हैं और इसमें पूरा साथ शासन द्वारा नियुक्त मंडी के अधिकारी और कर्मचारी कर रहे हैं l






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