
मेडिकल जर्नल लैंसेट के एक अध्ययन के मुताबिक भारत और श्रीलंका में ज्यादा मीठा खाने से कई मौखिक बीमारियां बढ़ रही है। इसके चलते खासतौर पर पुरुषों में मौखिक बीमारियां हो रही हैं। बता दें कि, उत्तरी अमेरिका, लैटिन अमेरिका, आस्ट्रेलिया और पश्चिमी यूरोप में शक्कर युक्त पेय की खपत सबसे अधिक है। लेकिन, दिनचर्या और इस्तेमाल के तरीकों की वजह से भारत और श्रीलंका के लोग ज्यादा बीमार हो रहे हैं।
मौखिक रोगों में दांतों और मुंह को प्रभावित करने वाली कई स्थितियां शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से दांतों की सड़न, मसूड़ों की बीमारी और मुंह के कैंसर शामिल हैं। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया और अध्ययन के सह-लेखक मनु राज माथुर ने बताया कि, हम यह नहीं कह रहे हैं कि चीनी खराब है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल हानिकारक हो सकता है। अधिक चीनी खाना ओवर ऑल मौखिक स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।
रिपोर्ट के अनुसार, होंठ और मौखिक कैंसर दुनिया भर में 15 सबसे आम कैंसर में से एक हैं। साल 2018 में कम से कम आधे मिलियन लोग अलग-अलग तरह के मौखिक कैंसर की समस्या से जूझ रहे हैं। भारत में मौखिक विकार सबसे अधिक प्रचलित बीमारी की स्थिति है और पिछले 30 वर्षों से ऐसा ही है। दक्षिण एशियाई देशों में मुंह के कैंसर से पीड़ित लोगों की संख्या सबसे अधिक है। माथुर ने बताया कि, ‘मुंह के कैंसर के सबसे ज्यादा मामले भारत से आते हैं। इस तरह की मौखिक बीमारियां दुनिया भर में 3.5 बिलियन लोगों को प्रभावित कर रही हैं।’
मुंह के कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में राष्ट्रीय स्तर का सर्वेक्षण करने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना की। इनकी स्थापना ऐसे देशों में की गई है, जहां से मुंह के कैंसर के मरीज सबसे ज्यादा आ रहे हैं। मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के निदेशक डॉ महेश वर्मा ने बताया कि- अगर लोग इस तरह की मौखिक बीमारियों से बचने के लिए स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली वस्तुओं से परहेज कर लें, तो लगभग 95% दंत रोगों की रोकथाम की जा सकती है।





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