
वाशिंगटन। ट्रंप प्रशासन ने बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद जरीफ पर प्रतिबंध लगा दिया। इसका असर यह होगा कि अब अमेरिका स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ईरानी मिशन का दौरा करने में जरीफ को मुश्किल होगी। दरअसल जरीफ का अमेरिका में प्रवेश करना आसान नहीं होगा।
इस प्रतिबंध को अमेरिकी प्रशासन की एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका खामनेई समेत ईरान के विशेष बल रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और शीर्ष सैन्य प्रमुखों पर पहले ही प्रतिबंध लगा चुका है। खास बात यह है कि अमेरिका से ही जरीफ ने अपनी पढ़ाई की है।
हालांकि इस मामले में जरीफ का कहना है कि अमेरिका की इस तरह की कार्रवाई से उनके परिवार पर और उन पर कोई असर नहीं होगा। उनका कहना था कि मुझे चिंता करने की कोई बात नहीं है, क्योंकि मेरी संपत्तियां ईरान के बाहर नहीं हैं। जिसके कारण परेशानी की कोई बात नहीं है। दूसरी ओर अमेरिका के कोषागार मंत्री स्टीवन मेंयूचिन ने इस मामले में यह साफतौर पर कहा है कि अमेरिका के कदम से यह संदेश जाता है कि हमने ईरान के व्यवहार को सहन नहीं किया है।
गौरतलब है कि अमेरिका के एक निगरानी ड्रोन को ईरान ने मार गिराया था। इससे अमेरिका का रवैया तल्ख हो गया था। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर हमले का आदेश दे दिया था, लेलेकिन फिर हमले का निर्णय रद्द कर दिया गया। ईरान ने परमाणु करार को दरकिनार करते हुए, यूरेनियम के उपयोग को बढ़ाने की पहल की।
परमाणु करार खत्म होने के बाद बढ़ा तनाव
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए परमाणु करार को रद्द करते हुए अमेरिका के हटने की बात कही थी। । ईरान ने साल 2015 में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस, चीन और जर्मनी के साथ परमाणु करार किया था। इसके बाद इसे रद्द करते हुए अमेरिका ने ईरान पर कई प्रतिबंध लगाए थे। परमाणु करार में जरीफ ने अपना योगदान दिया था।
कभी वार्ता की बात कभी प्रतिबंध का साथ
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने विदेश मंत्री जरीफ पर अमेरिकी प्रतिबंध कोदोनों देशों के संबंधों के लिए एक बैरियर बताया। उनका कहना था कि कभी तो वे बिना शर्त बात करना चाहते हैं तो कभी इस तरह के प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं।





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